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India's LPG consumption slides 16% in April amid West Asia conflict

नई दिल्ली। वेस्ट एशिया में चल रहे राजनीतिक संघर्षों के चलते भारत में एलपीजी (तरल पेट्रोलियम गैस) की खपत में अप्रैल 2024 में 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह कमी पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में स्पष्ट है और इससे देश की ऊर्जा जरूरतों पर असर पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, अप्रैल में एलपीजी की बिक्री 2.45 मिलियन टन थी, जो कि पिछले महीने के मुकाबले लगभग 10.5% कम है।

भारत में एलपीजी की मांग में इस तरह की गिरावट के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें कीमतों में उतार-चढ़ाव, भंडारण समस्याएं, और विदेशी संकट विशेष रूप से वेस्ट एशिया संघर्ष का प्रभाव प्रमुख हैं। वेस्ट एशिया क्षेत्र, जो कि भारत का प्रमुख ऊर्जा स्रोत है, में अस्थिरता के चलते तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। यह स्थिति कीमतों को भी प्रभावित कर रही है और उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता पर प्रतिबंध लगा रही है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि ऊर्जा क्षेत्र की इस अनिश्चितता ने घरेलू बाजार में एलपीजी की खपत को सीधे प्रभावित किया है। कई घरों और व्यवसायों ने खपत में कटौती की है ताकि खर्चों को नियंत्रित किया जा सके। इसके अतिरिक्त, सरकार और ऊर्जा कंपनियां भी आपूर्ति स्थिरता के लिए प्रयासरत हैं, जिससे कि बाजार में संतुलन बना रहे।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में एलपीजी खपत का सीधा संबंध घरेलू गैस दृढ़ता, उद्योगों की गतिविधियों और आर्थिक गतिशीलता से है। भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी एक महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत है, जिसका उपयोग खाना पकाने से लेकर औद्योगिक प्रक्रियाओं तक किया जाता है। इसलिए, इसके इस्तेमाल में गिरावट आर्थिक संकेतकों के रूप में देखी जा रही है।

इसके अलावा, विशेषज्ञ यह भी बता रहे हैं कि वेस्ट एशिया संघर्ष के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयास जारी हैं, जिससे आने वाले महीनों में आपूर्ति में सुधार की उम्मीद है। एलपीजी बाजार में स्थिरता के लिए सरकार ने भी कुछ नई नीतियां बनाई हैं, जो उत्पादन और वितरण को बेहतर करने पर केंद्रित हैं।

कुल मिलाकर, अप्रैल 2024 में एलपीजी की खपत में आई 16% की गिरावट कई कारकों का परिणाम है, जो आर्थिक और भूराजनीतिक दोनों पक्षों को दर्शाता है। उपभोक्ताओं, कंपनियों और सरकार के बीच मिलकर काम करने से ही इस चुनौती का समाधान संभव होगा, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत बनी रहे।

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