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Why ESIC decided to directly run new hospitals: The West Bengal trigger
ईएसआईसी ने नए अस्पताल सीधे चलाने का फैसला क्यों किया: पश्चिम बंगाल की ट्रिगर
As countries urbanise, 38% of world's population will live in large cities by 2100: Study
जैसे-जैसे देश शहरीकरण की ओर बढ़ेंगे, 2100 तक दुनिया की 38% आबादी बड़े शहरों में रहेगी: अध्ययन
'Disbelief' in India camp after a failure to adapt to 'fantastic' Ireland
भारत के कैंप में ‘आश्चर्य और असमंजस’ ने लिया जन्म, ‘शानदार’ आयरलैंड के खिलाफ अनुकूलन में नाकामी
Only 10.2% women fielded in 20 Assembly polls since passage of women’s Bill in 2023: report
सिर्फ 10.2% महिलाएं ही मैदान में उतरीं, 2023 में महिला विधेयक पारित होने के बाद 20 विधानसभा चुनावों में: रिपोर्ट
Through The Magnificent Life, artist Rajesh RV imagines a world of harmony and hope
महान जीवन के माध्यम से, कलाकार राजेश आरवी ने सौहार्द और उम्मीद की दुनिया की कल्पना की
Ancient Aaykkudi Temple Discovered in Vizhinjam | Kerala Temple History
विजीनजं में प्राचीन अय्यकुडी मंदिर की खोज | केरल मंदिर इतिहास
It’s a bad idea to scratch bug bites, research says
कीट के काटने पर खुजलाना एक गलत कदम है, शोध में बताया गया
What decides your height?
क्या निर्धारित करता है आपकी ऊंचाई
Why is pregnancy sickness drug not easily accessible to all?
गर्भावस्था के दौरान बीमारी की दवा सभी के लिए उपलब्ध क्यों नहीं है
Krithi Karanth named 2026 Rolex National Geographic Explorer of the Year

बैंगलोर से प्रकाशित: क्रिति करण्थ, जो सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ स्टडीज (CWS) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं, वर्ष 2026 के रोल्स नेशनल जियोग्राफिक एक्सप्लोरर ऑफ द ईयर पुरस्कार की विजेता बनी हैं। वे दक्षिण एशिया की पहली ऐसी महिला हैं जिन्हें यह सम्मान मिला है। यह उपलब्धि भारतीय वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है।

क्रिति करण्थ ने इस सम्मान को पाने पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पुरस्कार न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह भारत में वन्यजीवों और उनकी सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे समर्पित प्रयासों को भी उजागर करता है। उन्होंने कहा कि भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष की जटिलताएँ इतनी बढ़ गई हैं कि एक समेकित, समावेशी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जो स्थानीय समुदायों की भागीदारी से पूरा किया जा सके।

CWS के तहत चलाए जा रहे संरक्षण कार्यक्रम इन जटिलताओं का समाधान खोजने में लगातार सक्रिय रह चुके हैं। संगठन ने पिछले चार दशकों में कई प्रभावी परियोजनाओं को अंजाम दिया है, जिसमें हाथियों और बाघों जैसे प्रमुख वन्यजीवों के आवास संरक्षण से लेकर वन्यजीवों के व्यवहार पर शोध, और मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए सामुदायिक भागीदारी सम्मिलित है।

क्रिति ने यह भी बताया कि CWS के लिए आगामी वर्षों में नई चुनौतियाँ और अवसर दोनों ही हैं। जलवायु परिवर्तन, वन विनाश, और बढ़ती आबादी जैसे कारकों ने जंगली जीवन के अस्तित्व पर गंभीर प्रभाव डाला है। इसलिए, संस्थान ने नयी तकनीकों और डेटा-संचालित शोध को अपनाते हुए व्यापक संरक्षण नेटवर्क का निर्माण किया है। साथ ही, वे स्थानीय लोगों को जागरूक करने और उनके साथ मिलकर काम करने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं ताकि दोनों पक्षों के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।

वह इस दिशा में युवाओं और वैश्विक समुदाय की भागीदारी को भी आवश्यक मानती हैं। क्रिति करण्थ का मत है कि वन्यजीव संरक्षण केवल वैज्ञानिकों का कार्य नहीं है, बल्कि पूरे समाज की ज़िम्मेदारी है। इस पुरस्कार के माध्यम से वे भारत के जंगलों और उनकी जैव विविधता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाना चाहती हैं, जिससे विश्व भर से और अधिक समर्थन और संसाधन मिल सकें।

क्रिति करण्थ की यह उपलब्धि भारतीय वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक नयी इबारत लिखने वाली है। उन्होंने यह साबित किया है कि समर्पण, कड़ी मेहनत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से हम जटिल पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर सकते हैं और एक बेहतर भविष्य की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।

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