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Indian scientists recreate key functions of human Placenta on chip

नई दिल्ली। मानव गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा एक महत्वपूर्ण अंग होता है जो भ्रूण के विकास के लिए अनिवार्य जैविक प्रक्रियाओं को संचालित करता है। भारतीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने हाल ही में एक ऐसा उपकरण विकसित किया है, जो मानव प्लेसेंटा के कई महत्वपूर्ण कार्यों को चिप पर दोबारा प्रदर्शित करता है। इस तकनीकी विकास से गर्भावस्था संबंधी अनेक शोधों में नई दिशा मिलने की संभावना जताई जा रही है।

इस डिवाइस के जरिए प्लेसेंटा की प्रमुख भूमिकाएं जैसे हार्मोन उत्पादन, पोषक तत्वों का आदान-प्रदान, अपशिष्ट पदार्थों का निष्कासन और चयनात्मक अवरोधक क्रिया को पुनः सजीव रूप में दर्शाया गया है। यह उन जैविक प्रक्रियाओं में से हैं, जो गर्भावस्था को सफल और सुरक्षित बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस पहल से गर्भावस्था के दौरान आने वाली जटिलताओं को समझने और उनका समाधान खोजने में मदद मिलेगी।

भारत में इस खोज में कई प्रतिष्ठित संस्थानों के वैज्ञानिक शामिल हैं जिन्होंने प्लेसेंटा को चिप पर पुनः प्रस्तुत करने के लिए नवीनतम बायोमेडिकल तकनीकों का उपयोग किया है। यह उपकरण न केवल चिकित्सा अनुसंधान में सहायक होगा, बल्कि गर्भावस्था से जुड़े रोगों की जांच और उपचार के लिए भी उपयोगी साबित होगा।

प्लेसेंटा गर्भावस्था में मां और भ्रूण के बीच पोषक तत्वों और ऑक्सीजन के आदान-प्रदान का कार्य करता है। इसके अलावा यह जैविक बाधा के रूप में विषैले तत्वों को भ्रूण तक पहुँचने से रोकता है। इस नए चिप आधारित मॉडल के माध्यम से इन जटिल प्रक्रियाओं को नियंत्रित रूप में परीक्षण किया जा सकेगा, जिससे गर्भावस्था संबंधी जोखिमों को पहले से पहचानना संभव होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक गर्भावस्था से जुड़ी दवाओं के प्रभावों को समझने, नवजात शिशुओं की सुरक्षा और महिलाओं के स्वास्थ्य संरक्षण के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। साथ ही, इस शोध से विश्व स्तर पर जैवप्रौद्योगिकी और चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में भारत की छवि भी मजबूत होगी।

यह परियोजना भारतीय वैज्ञानिक समुदाय की एक बड़ी उपलब्धि है और भविष्य में इससे और भी कई चिकित्सीय अनुप्रयोगों का विकास होने की उम्मीद जताई जा रही है। शोधकर्ताओं ने कहा कि आगे इस तकनीक को और विकसित कर अधिक सटीक और व्यापक परीक्षण किए जाएंगे ताकि मातृसंबंधी स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान निकाला जा सके।

इस प्रकार, मानव प्लेसेंटा के कार्यों को चिप पर पुनः निर्मित करने वाली यह तकनीक गर्भावस्था को समझने और सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, और आने वाले समय में इससे तमाम चिकित्सा चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी।

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