केरल के वायनाड जिले में मानसूनी बारिश की कमी ने कृषि गतिविधियों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। ह्यूम सेंटर फॉर इकलॉजी एंड वाइल्डलाइफ बायोलॉजी के अनुसार, इस वर्ष जून महीने में वायनाड को केवल 270.23 मिलीमीटर बारिश मिली है, जो पिछले पांच वर्षों में इस महीने के लिए सबसे कम मात्रा है।
किसान इस बारिश की कमी से काफी चिंतित हैं क्योंकि वायनाड की अर्थव्यवस्था बड़ी हद तक कृषि पर निर्भर करती है। यहां की प्रमुख फसलें, जिनमें कॉफी, चाय, मसाले और पादप आधारित फसलें शामिल हैं, बारिश पर सीधे निर्भर हैं। कम बारिश के कारण फसलों को जरूरी नमी नहीं मिल पाई है, जिससे उनकी गुणवत्ता और पैदावार दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
स्थानीय किसानों का कहना है कि मौसम में आई यह अनियमितता और विकासशील जलवायु परिवर्तन के कारण रोजमर्रा की खेती पर विपरीत असर पड़ रहा है। “हमारे खेतों में पानी की कमी हो रही है, जिससे पौधों की ग्रोथ रुक रही है। इससे हमारी आने वाली फसल पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा,” एक किसान ने बताया।
वायु, मिट्टी की गुणवत्ता और समय पर पानी न मिलने जैसे कारकों से फसलों की पोषण सामग्री कम हो रही है। इससे किसानों की आमदनी में गिरावट आने की संभावना है, जिससे उनकी आजीविका पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। कृषि विशेषज्ञ भी इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं और उन्होंने स्थानीय प्रशासन से तुरंत कदम उठाने का आग्रह किया है।
वहीं, स्थानीय प्रशासन ने किसानों की सहायता के लिए सिंचाई व्यवस्था सुधारने और बारिश पर आधारित तटीय फसलों के विकल्प पर काम करना शुरू कर दिया है। पर्यावरण और कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और मौसम की भविष्यवाणी के आधार पर किसानों को सलाह प्रदान करेंगे।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाकर और जल संरक्षण के उपाय करके इस संकट से निपटा जा सकता है। जल संचयन तालाबों का निर्माण, ड्रिप सिंचाई तकनीक और सूखे प्रतिरोधी फसलों की खेती से किसानों की उत्पादकता में सुधार होगा।
इस प्रकार, वायनाड के किसानों को वर्तमान में अपनी खेती में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश की कमी एक गंभीर समस्या है जो केवल फसलों को ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक स्थिरता को भी प्रभावित कर रही है। सरकार और किसानों को मिलकर ही इस संकट का सामना करना होगा, ताकि वायनाड की कृषि फिर से समृद्ध और स्थायी बन सके।

