नई दिल्ली। थिएटर प्रैक्टिशनर सुजाता बालकृष्णन ने अपनी पहली चित्र पुस्तक “वी आर फैमिली” के माध्यम से गोद लेने की प्रक्रिया और इसके भावनात्मक पहलुओं पर एक नई रोशनी डाली है। यह पुस्तक न केवल बच्चों के लिए आकर्षक है बल्कि परिवार के महत्व और अपनाने की सुंदरता को भी दिल से समझाती है।
“वी आर फैमिली” को लिखा और चित्रित किया गया है ताकि बच्चे और उनके अभिभावक इस संवेदनशील विषय पर खुलकर बात कर सकें। सुजाता का उद्देश्य है कि समाज में गोद लेने को लेकर जो भ्रम और संकोच हैं, उन्हें दूर किया जाए और इसे एक सामान्य, प्यारा और सकारात्मक अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया जाए।
साक्षात्कार में सुजाता ने बताया कि उनके थिएटर अनुभव ने उन्हें कहानी कहने की कला में पारंगत बनाया, जिससे वे चित्र पुस्तक के माध्यम से यह संदेश सरल और स्पष्ट तरीके से दे पाईं। “पुस्तक में परिवार के विभिन्न रूपों को दिखाया गया है, जिसमें गोद लेना भी शामिल है, जिससे हर बच्चा अपने आप को इस कहानी में देख सके,” उन्होंने कहा।
गोद लेने को सामाजिक दृष्टि से समझना आवश्यक है क्योंकि यह प्रक्रिया केवल कानूनी कदम नहीं बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और परिवार की नई शुरुआत का प्रतीक भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को इस विषय पर संवाद के लिए सामग्री उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है ताकि वे खुद में और परिवार में अपनापन महसूस कर सकें।
“वी आर फैमिली” ने रिलीज़ होते ही शिक्षा जगत और सामाजिक संगठनों से सराहना प्राप्त की है। कई स्कूलों और पुस्तकालयों ने इसे अपने संग्रह में शामिल किया है ताकि छोटे बच्चों को इस विषय की समझ बढ़ाई जा सके।
समाज में गोद लेने को लेकर बढ़ती जागरूकता और सकारात्मक दृष्टिकोण के लिए इस तरह की रचनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सुजाता बालकृष्णन की यह पुस्तक एक मिसाल है कि कैसे हम संवेदनशील विषयों को बच्चों के अनुकूल तरीके से प्रस्तुत कर सकते हैं।
अंत में, “वी आर फैमिली” एक ऐसी पुस्तक है जो न केवल जानकारी देती है बल्कि बच्चों के दिलों में अपनत्व और प्यार की भावना भी जगाती है। इसे पढ़कर बच्चे और माता-पिता दोनों ही गोद लेने को एक सुंदर और स्वाभाविक जीवन हिस्सा समझेंगे।

