नई दिल्ली: भारत सरकार और सेना की ओर से एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, अगले पांच वर्षों में 790 T-72 टैंकों की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए ₹13,000 करोड़ से अधिक की योजना बनाई गई है। इस योजना का उद्देश्य भारतीय रक्षा उद्योग को मजबूत करना और सेना की जिम्मेदारी बढ़ाना है।
यह परियोजना न केवल टैंकों की उम्र बढ़ाने तथा उनकी युद्धक क्षमता बढ़ाने के लिए होगी, बल्कि इससे रक्षा संबंधित उद्योगों को भी मजबूती मिलेगी, जो लंबे समय से विकास की राह में अग्रिम भूमिका निभा रहे हैं।
सैन्य अधिकारियों के अनुसार, T-72 टैंक भारतीय सेना की पीढ़ी के प्रमुख युद्धक उपकरणों में से एक हैं, जिनकी नियमित सेवा और सुधार से देश की सुरक्षा क्षमता में वृद्धि होगी।
इस परियोजना के अंतर्गत टैंक के महत्वपूर्ण घटकों की मरम्मत, तकनीकी सुधार और आधुनिकीकरण किया जाएगा ताकि ये आधुनिक युद्ध परिस्थितियों के हिसाब से बेहतर प्रदर्शन कर सकें। इसके लिए लाइसेंस प्राप्त तकनीकों और घरेलू स्तर पर विकसित तकनीकों का संयोजन किया जाएगा।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस प्रकार के प्रोजेक्ट से रक्षा उद्योग में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, इस कार्य में लगे श्रमिकों और इंजीनियरों के कौशल में वृद्धि होगी, जो भविष्य में अन्य रक्षा परियोजनाओं के लिए भी महत्त्वपूर्ण साबित होगा।
सरकार ने यह भी बताया है कि T-72 टैंकों का नवीनीकरण किसानों की मदद से संबंधित क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक विकास को भी प्रभावित करेगा, क्योंकि इससे रक्षा क्षेत्र में निरंतर निवेश सुनिश्चित होगा।
सेना सूत्रों ने बताया कि इस योजना के तहत टैंकों के अलावा अन्य हथियार प्रणालियों और उपकरणों के भी सुधार और नवीनीकरण की संभावना है, जिससे सेना की समग्र युद्ध क्षमता में वृद्धि होगी।
इस पहल को लेकर रक्षा विशेषज्ञों में उत्साह है और इसे भारत के रक्षा आत्मनिर्भरता मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना का क्रियान्वयन चरणबद्ध तरीके से होगा और नियमित निगरानी के साथ गुणवत्ता एवं समय सीमा का पालन किया जाएगा।
अंत में, यह योजना न केवल सेना की लड़ाकू क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि देश के रक्षा क्षेत्र में आर्थिक विकास और तकनीकी उन्नति की दिशा में भी एक मजबूत संदेश है।

