नई दिल्ली: हाल ही में प्रकाशित एक विश्लेषण के अनुसार, मई 2026 में भारत के कुल तेल आयात में रूस का योगदान 40 प्रतिशत से अधिक हो गया है, जबकि प्रीमियम मूल्य का चलन जारी रहा। यह आंकड़ा भारत की ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक रणनीतियों में महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है।
थ हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, रूस से तेल आयात में बढ़ोतरी के साथ ही भारत ने अप्रैल और मई 2026 में एक बार फिर से ईरान और वेनेजुएला से भी तेल आयात शुरू किया। यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में साझा जोखिमों और वैकल्पिक स्रोतों की तलाश का संकेत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से बढ़े हुए आयात के बावजूद, भारत की कोशिश थी कि देश के ऊर्जा पोर्टफोलियो को कहीं ज्यादा संतुलित और विविध बनाया जाए। ईरान और वेनेजुएला से आयात शुरू करना इसी दिशा में एक रणनीतिक निर्णय माना जा रहा है, जो किसी भी प्रकार के आपूर्ति व्यवधान से निपटने में मददगार होगा।
इसके अलावा, रूस के तेल पर प्रीमियम मूल्य लगाए जाने के बावजूद, भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस विकल्प को प्राथमिकता दी है। यह तथ्य भी दर्शाता है कि भारत अब अधिक आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ विदेश नीति में भी नए समीकरण बना रहा है।
तेल के बढ़ते महत्व और भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के चलते ऊर्जा सुरक्षा पर देश का ध्यान लगातार बढ़ रहा है। विश्व बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, भारत ने स्थिरता बनाए रखने के प्रयास तेज कर दिए हैं।
आयात के इस विविधीकरण से यह भी उम्मीद की जा रही है कि भारत को भविष्य में वैश्विक ऊर्जा संकट का सामना कम करना पड़ेगा। साथ ही, यह कदम देश के अंदरुनी उद्योगों को भी मजबूती प्रदान करेगा, जो ऊर्जा पर अधिक निर्भर हैं।
भारत की ऊर्जा नीति विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि इस अवधि में भारत ने वैश्विक रणनीतिक भागीदारों के साथ संबंध मजबूत करने की दिशा में काम किया है, जो दीर्घकालीन ऊर्जा सुरक्षा के लिए मददगार साबित होगा।
अन्ततः, मई 2026 में रूस के तेल आपूर्ति में 40% से अधिक हिस्सा होने और ईरान एवं वेनेजुएला से पुनः आयात शुरू करने के इस विश्लेषण ने यह स्पष्ट किया है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपना रहा है। यह कदम न केवल आर्थिक बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी देश के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
इस तथ्य से यह भी संकेत मिलता है कि भारत भविष्य में ऊर्जा मामले में और अधिक मजबूत तथा स्वतंत्र बनने के लिए सतत प्रयास करेगा, जिससे राष्ट्रीय विकास की गति और तेज हो सके।

