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नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2024: शिशुओं के संगीत के प्रति संवेदी प्रतिक्रिया और उनके प्राकृतिक आंदोलन को लेकर एक नए अध्ययन ने उनके मस्तिष्क की गतिविधि के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की है। यह शोध नवजात शिशुओं के पहले वर्ष के दौरान उनके संगीत सुनने पर उनके दिमागी और शारीरिक प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण करता है।

यह अध्ययन वैज्ञानिकों और न्यूरोसाइंटिस्ट्स के एक समूह द्वारा किया गया, जिन्होंने शिशुओं के मस्तिष्क और शारीरिक गतिविधि को मापन के लिए उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल किया। शोध के अनुसार, शिशु जन्म के कुछ ही हफ्तों में संगीत के प्रति प्रतिक्रिया देना शुरू कर देते हैं, जो उनके तंत्रिका तंत्र के विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

शोध में पाया गया कि संगीत सुनते समय शिशु न केवल अपने कानों से ध्वनि ग्रहण करते हैं, बल्कि उनके मस्तिष्क भी सक्रिय हो जाते हैं और वे स्वाभाविक रूप से संगीत के साथ ताल मेल करते हुए शारीरिक गतिविधियां करते हैं। यह प्रक्रिया उनके संज्ञानात्मक विकास और सुनने की क्षमता को बेहतर बनाती है।

अध्ययन में शामिल शोधकर्ताओं ने बताया कि संगीत से शिशुओं में भावनात्मक जुड़ाव और सामाजिक संपर्क में सुधार होता है। शिशु संगीत सुनते समय मुस्कुराते हैं, पैर पटकते हैं और विभिन्न शारीरिक हावभाव दिखाते हैं, जो उनकी आनुवांशिक और न्यूरोलॉजिकल प्रतिक्रिया को दर्शाता है।

इस शोध के प्रामाणिक डेटा से स्पष्ट हुआ कि संगीत के प्रति मस्तिष्क की प्रतिक्रिया नवजात अवस्था से ही शुरू हो जाती है और यह प्रतिक्रिया बच्चे के संपूर्ण विकास में सहायक भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि संगीत आधारित गतिविधियाँ शिशुओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी साबित हो सकती हैं।

यह अध्ययन बच्चों के पालन-पोषण में संगीत को शामिल करने के महत्व को भी रेखांकित करता है। अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से संगीत सुनाएं और उनके साथ संगीत गतिविधियों में भाग लें, जिससे बच्चों की संवेदी और संज्ञानात्मक क्षमताओं का विकास हो सके।

अंततः यह शोध संगीत और नवजात शिशुओं के बीच गहरे संबंध को स्थापित करता है, जो मानसिक विकास के लिए आधारभूत है। भविष्य में भी ऐसे अध्ययन आवश्यक होंगे जो संगीत के प्रभाव को विभिन्न आयु वर्गों में समझने में मदद करें।

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