नई दिल्ली। राष्ट्रीय जनता दल (एनसी), कांग्रेस और वामपंथी दलों ने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए दिल्ली में एक संयुक्त प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन केंद्र सरकार की ओर से राज्य के विशेष दर्जे को खत्म करने के निर्णय के खिलाफ था। शुरुआत में प्रदर्शन को जंतर-मंतर पर आयोजित करने की योजना थी, लेकिन पुलिस प्रशासन ने अनुमति नहीं दी, जिससे प्रदर्शन स्थल को बदलकर संसद के निकट और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर ले जाना पड़ा।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, छात्र और आम नागरिक भाग लेने पहुंचे। नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों की निंदा करते हुए जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को बहाल करने और राज्य के पुनर्वास को प्राथमिकता देने की मांग की। एनसी के वरिष्ठ नेता और कांग्रेस के कई प्रमुख सदस्यों ने भी मंच से केंद्र की आलोचना की। वामपंथी दलों ने कहा कि इस फैसले से क्षेत्र की राजनीतिक स्थिरता पर गंभीर खतरा है और सभी पार्टियों को मिलकर इसका समाधान निकालना होगा।
प्रदर्शन के दौरान बाँटे गए फलक और बैनरों में ‘‘जम्मू-कश्मीर को पूरा राज्य वापस दो’’ और ‘‘संविधान और लोकशाही की रक्षा करो’’ जैसे नारे लिखे दिखाई दिए। प्रदर्शन समाप्ति के बाद शांति पूर्वक सभी प्रदर्शनकारी वापस लौट गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिलाने की मांग सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकारों से जुड़ी हुई है, जिसे सभी दलों की एकता से ही मजबूत आवाज मिल सकती है। विपक्षी दलों का यह संयुक्त प्रयास आगामी राजनीतिक वार्ता में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
केंद्र सरकार ने अभी तक प्रदर्शनकारियों की मांगों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। एसपी और प्रशासन ने प्रदर्शन को शांति और व्यवस्था बनाए रखने के साथ समाप्त कराने में सफलता हासिल की। इस प्रदर्शन ने जम्मू-कश्मीर के भविष्य को लेकर राजनीतिक गतिशीलता को फिर से उजागर किया है, जो आने वाले दिनों में और भी चर्चाओं को जन्म देगा।

