लंदन: यूनाइटेड किंगडम में तीन मिलियन से अधिक लोग रात की पाली में काम करते हैं, जो उनकी सेहत पर गहरा असर डाल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, रात की पाली में काम करने वाले कर्मचारियों को नींद की कमी और स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह समस्या समाज और उद्योग दोनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
रात की पालियों में काम करना शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी को प्रभावित करता है। इससे नींद की गुणवत्ता कम हो जाती है और शारीरिक व मानसिक तनाव बढ़ता है। डॉक्टरों का कहना है कि लगातार लंबे समय तक रात की पाली में काम करने से हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा और डिप्रेशन जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टर सारा मितल ने बताया, “रात में जागने और दिन में सोने की आदत हमारे शरीर के लिए प्राकृतिक नहीं है, और इससे हार्मोनल असंतुलन पैदा होता है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ती है।”
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस समस्या को कम करने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं। सबसे महत्वपूर्ण है सही तरीके से नींद लेना और काम के बीच उचित ब्रेक लेना। यदि संभव हो तो आराम करने के लिए मिलती-जुलती जगह पर सोना, और काले पर्दों से कमरे को पूरी तरह अंधेरा बनाकर दिन में अच्छी नींद लेना जरूरी है।
इसके अलावा, संतुलित आहार लेना और नियमित व्यायाम करना न सिर्फ शरीर को तंदुरुस्त बनाता है, बल्कि थकान कम करने में भी मदद करता है। कई कंपनियां अब कर्मचारियों के लिए फ्लेक्सिबल शिफ्ट की सुविधा भी देना शुरू कर रही हैं, ताकि उनकी सेहत का बेहतर ध्यान रखा जा सके।
सरकारी और स्वास्थ्य संगठनों द्वारा रात की पाली में काम करने वालों के लिए जागरूकता अभियानों का आयोजन भी किया जा रहा है। उनका उद्देश्य लोगों को नींद की महत्ता और उसी के अनुसार जीवनशैली अपनाने की सलाह देना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समाज और उद्योगों को मिलकर ऐसे कदम उठाने होंगे जिससे काम की ड्यूरेशन, आराम और स्वास्थ्य में संतुलन हो। तभी रात की पाली में काम करने वाले लाखों लोगों को बेहतर जिंदगी का मौका मिल सकता है।

