cpi – Jan Drishti News https://www.jandrishtinews.com jandrishtinews.com Mon, 15 Jun 2026 10:37:48 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://www.jandrishtinews.com/wp-content/uploads/2026/04/lodo-150x150.png cpi – Jan Drishti News https://www.jandrishtinews.com 32 32 मई में ईंधन, खाद्य एवं निर्मित वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण WPI महंगाई दर 9.68% पहुंची https://www.jandrishtinews.com/2026/06/15/wpi-inflation-rate-reached-9-68-in-may-due-to-increase-in-prices-of-fuel-food-and-manufactured-goods/ Mon, 15 Jun 2026 10:37:48 +0000 https://www.jandrishtinews.com/wpi-inflation-rate-reached-9-68-in-may-due-to-increase-in-prices-of-fuel-food-and-manufactured-goods/ नई दिल्ली: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मई माह के लिए थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर जारी की है, जिसमें आधार वर्ष को पुराने 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया है। इस नवीनतम आंकड़े के अनुसार, मई महीने में WPI महंगाई दर 9.68 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जो ईंधन, खाद्य सामग्री तथा निर्मित वस्तुओं के मूल्य में वृद्धि के कारण हुई है।

थोक मूल्य सूचकांक वह मापक है जो वस्तुओं के थोक स्तर पर मूल्य परिवर्तनों को दर्शाता है। इस सूचकांक में आए बदलाव से खासकर उपभोक्ताओं एवं उद्योगों को महंगाई की नई तस्वीर सामने आई है। मंत्रालय ने आधार वर्ष को अपडेट कर महंगाई के वास्तविक प्रभाव को अधिक पारदर्शी और प्रासंगिक बनाने का प्रयास किया है।

मई माह में ईंधन की कीमतों में खासतौर पर वृद्धि देखी गई, जिससे परिवहन तथा उत्पादन लागत बढ़ गई। खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने से आम आदमी की जेब पर सीधे असर पड़ा है। इसके साथ ही निर्मित वस्तुओं की कीमतों में भी उछाल आया है, जो कच्चे माल की महंगाई एवं वैश्विक मांग में वृद्धि के चलते हुआ।

विशेषज्ञों का मानना है कि WPI महंगाई दर में यह बढ़ोतरी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) से भिन्न है, लेकिन दोनों सूचकांक मिलकर देश की आर्थिक स्थिति पर महंगाई दबाव को समझने में मदद करते हैं। थोक स्तर पर महंगाई बढ़ने से अगले कुछ महीनों में खुदरा कीमतों में भी बढ़ोतरी के संकेत मिलते हैं।

मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट में साफ किया गया है कि पिछले वर्षों की तुलना में आधार वर्ष के बदलाव के कारण आंकड़ों में तुलना हेतु थोड़ा निरंतरता चुनौतीपूर्ण हो सकती है, लेकिन यह कदम आर्थिक नीतियों की योजना और सही मूल्यांकन के लिए आवश्यक था।

सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि महंगाई पर नियंत्रण रखने के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे, और मूल्य स्थिरता के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। वहीं, उपभोक्ताओं एवं व्यापार जगत को भी बदलते आर्थिक परिदृश्य के अनुसार समायोजन करना होगा।

इस महंगाई के दबाव के बीच, विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि घरेलू बजट की योजना तैयार करते समय इन नई कीमतों को ध्यान में रखा जाए ताकि आर्थिक चुनौतियों का सामना आसानी से किया जा सके। सरकार की मंशा है कि समय रहते उचित नीति उपायों के माध्यम से इस बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण पाया जाए और आम जनता को राहत मिल सके।

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CPI(M) ने पूर्व CM विजयण पर ED छापे की निंदा की https://www.jandrishtinews.com/2026/05/27/cpim-condemns-ed-raid-on-former-cm-vijayan/ Wed, 27 May 2026 04:16:26 +0000 https://www.jandrishtinews.com/cpim-condemns-ed-raid-on-former-cm-vijayan/ नई दिल्ली: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), CPI(M) ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के घर प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा किए गए छापे की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की नीयत से प्रेरित बताया है और इसे राज्य में लोकतंत्र तथा कोविड के बीच चल रहे प्रशासनिक दबाव के खिलाफ घटित एक गलत कदम बताया है।

पिछले दिनों EDM द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री विजयण के विरुद्ध अचानक छापे मारे गए। इसके बाद CPI(M) की ओर से यह बयान जारी किया गया कि ऐसी कार्रवाई से न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरता है, बल्कि जनता के बीच भ्रांतियां और अस्थिरता भी फैलती हैं। पार्टी ने सरकार से मांग की है कि वह इस मामले में तटस्थ और निष्पक्ष जांच कराए।

पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ जो भी जांच हो, वह पूरी पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आरोपों की जांच के नाम पर राजनीतिक प्रतिशोध नहीं लिया जाना चाहिए। CPI(M) का यह भी कहना है कि राजनीतिक विपक्ष पर दबाव डालने वाली इस कार्रवाई से राज्य में चुनावी सभाओं तथा राजनीतिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

विपक्षी दलों के साथ-साथ नागरिक समाज के कई वर्गों ने भी ED के इस छापे की आलोचना की है। उनका मानना है कि इससे न्यायिक व्यवस्था और स्वतंत्र जांच एजेंसियों की छवि प्रभावित होती है। साथ ही यह सवाल उठता है कि क्या यह कार्रवाई केंद्रीय सरकार की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

बता दें कि पिछले कुछ समय से राजनीतिक नेताओं और खासतौर पर विपक्षी दलों के वरिष्ठ सदस्यों पर छापेमारी और जांच की घटनाएँ बढ़ी हैं। इसे लेकर लोकतंत्र, स्वतंत्रता और कानून व्यवस्था पर व्यापक बहस छिड़ी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जांच एजेंसियों को राजनीतिक दलों से स्वतंत्र रहकर निष्पक्ष तरीके से अपना काम करना चाहिए, ताकि जनता का विश्वास बचा रहे।

इस मसले पर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री विजयण पर ED की कार्रवाई का असली मकसद आगामी चुनावों पर असर डालना हो सकता है, क्योंकि केरल की राजनीति में CPI(M) की मजबूत पकड़ है। छापेमारी के बाद पार्टी संगठन ने सभी स्तरों पर एकजुटता दिखाने का आह्वान किया है।

इस पूरे घटनाक्रम को आगामी दिनों में कानूनी और राजनीतिक स्तर पर और विस्तार मिलने की संभावना है। जनता और मीडिया की नज़रें इस मामले की निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।

अंत में, राजनीतिक स्थिरता और न्याय व्यवस्था की सम्मानजनक स्थिति बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि सभी जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हों, जिससे लोकतंत्र मजबूत हो और जनता का भरोसा बना रहे।

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CPI(M) ने NTA को समाप्त करने की मांग की, धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की भी मांग https://www.jandrishtinews.com/2026/05/24/cpim-demands-abolition-of-nta-also-demands-resignation-from-dharmendra-pradhan/ Sun, 24 May 2026 04:49:18 +0000 https://www.jandrishtinews.com/cpim-demands-abolition-of-nta-also-demands-resignation-from-dharmendra-pradhan/ नई दिल्ली। राजनीतिक दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI(M)) ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को समाप्त करने की जोरदार मांग की है। पार्टी का कहना है कि NTA द्वारा आयोजित परीक्षाओं में सुरक्षा और प्रक्रिया से जुड़ी कई बार चूक हुई है, जिसके कारण छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही CPI(M) ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस मामले में इस्तीफा देने की भी अपील की है।

पार्टी ने आरोप लगाया है कि 2017 में स्थापित NTA के दौरान अब तक कम से कम चार बार परीक्षा कागजात और प्रश्नपत्रों के लीक होने की घटनाएं सामने आई हैं। इन लीक होने वाली घटनाओं ने परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। यह स्थिति न केवल छात्रों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की छवि को भी नुकसान पहुंचा रही है।

CPI(M) की ओर से जारी बयान में कहा गया है, “एनटीए के गठन के बाद से इसके कामकाज में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। परीक्षा संचालन में अनेक समस्याएं और तकनीकी खामियां उजागर हुई हैं, जिसके चलते छात्रों को निराशा हुई है। एजेंसी के संचालन में पारदर्शिता की कमी स्पष्ट है और इस कारण से उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।”

पार्टी का मानना है कि शिक्षा क्षेत्र में विश्वास बहाल करने के लिए ऐसी एजेंसियों को कड़े नियंत्रण और निगरानी के तहत लाना होगा अथवा उन्हें पूरी तरह समाप्त कर देना चाहिए। CPI(M) ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह इस मामले में त्वरित कदम उठाए और धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में चल रहे शिक्षा संगठनों का पुनर्मूल्यांकन करे।

धर्मेंद्र प्रधान, जो वर्तमान में केंद्रीय मंत्री हैं, इस विवादित स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराए जा रहे हैं। पार्टी का आरोप है कि मंत्री ने एजेंसी की जांच और सुधार के लिए उचित कदम नहीं उठाए, जिससे स्थिति और बिगड़ी। ऐसे में उनका इस्तीफा ही उचित माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, परीक्षा प्रणाली में मानक बनाए रखना बेहद जरूरी है ताकि विद्यार्थियों को न्याय मिल सके। किसी भी एजेंसी द्वारा लीक जैसी घटनाएं शिक्षा के लिए खतरा हैं और उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए। एनटीए को चाहिए कि वह परीक्षा सुरक्षा और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए अपनी नीतियां सख्त करे।

इस पूरे विवाद ने शिक्षा क्षेत्र में सुधार और जांच प्रक्रिया की महत्ता को फिर से प्रकाश में ला दिया है। छात्रों एवं अभिभावकों की अपेक्षाएं स्पष्ट हैं कि परीक्षा प्रतियोगिताएं निष्पक्ष और सुरक्षित होनी चाहिए। इसके बिना शिक्षा प्रणाली में विश्वास बनाए रखना संभव नहीं है।

इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस जारी है और आने वाले दिनों में इस पर और भी बयान आ सकते हैं। फिलहाल CPI(M) की मांगें केंद्र सरकार के समक्ष एक चुनौती बनकर खड़ी हैं, जिनका जवाब मिलना आवश्यक है।

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CPI ने केंद्रीय मंत्री बांदी संजय कुमार से बेटे के POCSO केस पर तत्काल इस्तीफा माँगा https://www.jandrishtinews.com/2026/05/11/cpi-demands-immediate-resignation-from-union-minister-bandi-sanjay-kumar-over-sons-pocso-case/ Mon, 11 May 2026 06:03:09 +0000 https://www.jandrishtinews.com/cpi-demands-immediate-resignation-from-union-minister-bandi-sanjay-kumar-over-sons-pocso-case/ नई दिल्ली: तेलंगाना में केंद्रीय मंत्री बांदी संजय कुमार के पुत्र पर POCSO अधिनियम के तहत यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज होने के बाद, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) ने मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग की है। पार्टी ने मामले की गम्भीरता को देखते हुए कहा है कि ऐसे आरोपों के सामने मंत्री को अपनी जिम्मेदारी से हट जाना चाहिए।

POCSO (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेन्सेस) एक्ट बच्चों के यौन शोषण के मामलों से निपटने के लिए बनाया गया एक विशेष कानून है, और इस मामले में मंत्री के पुत्र पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगना राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा गया है। CPI के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि कानून के अनुरूप जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

पीड़ित पक्ष ने भी आरोप लगाया है कि मामले की जांच में देरी की जा रही है, यह एक गंभीर चिंता का विषय है। CPI ने सरकार से अपील की है कि वे इस मामले में न्यायिक स्वतंत्रता बनाए रखें और कानून को अपना पूर्ण कठोर रूप दिखाने दें।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस मामले ने तेलंगाना और केंद्र सरकार दोनों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर लगातार केंद्र सरकार और मंत्री पर दबाव बना रहे हैं। वहीं, बांदी संजय कुमार ने दिए गए मीडिया बयानों में आरोपों को नकारते हुए कहा है कि वे पूरी तरह निर्दोष हैं और जांच में सहयोग करेंगे।

केंद्र सरकार की ओर से भी कहा गया है कि आगे की कानूनी प्रक्रिया में किसी को भी बगैर सबूतों के दोषी नहीं ठहराया जाएगा। सरकार ने आश्वासन दिया है कि पीड़ित को न्याय मिलेगा और किसी भी प्रकार की राजनीति इस मामले में नहीं चलेगी।

इस घटना के बाद सामाजिक संगठनों और नागरिकों की भी भागीदारी बढ़ गई है, जो बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के लिए आंदोलन कर रहे हैं। POCSO एक्ट के तहत ऐसे मामलों में तेजी से न्याय सुनिश्चित करने की मांग जोर पकड़ रही है ताकि बच्चों को बेहतर सुरक्षा मिल सके।

अभी जांच प्रक्रिया जारी है और आगे के अपडेट जनता के साथ साझा किए जाएंगे। इस मामले ने देशभर में बाल सुरक्षा कानूनों की सख्ती और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर नया विमर्श शुरू कर दिया है।

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पश्चिम बंगाल चुनाव चरण II: तृणमूल के गढ़ में BJP के दिग्गज और CPI(M) के युवा मोर्चे ने चुनौती दी https://www.jandrishtinews.com/2026/04/28/west-bengal-election-phase-ii-trinamool-stronghold-challenged-by-bjp-stalwart-and-cpim-youth-front/ Tue, 28 Apr 2026 09:24:32 +0000 https://www.jandrishtinews.com/west-bengal-election-phase-ii-trinamool-stronghold-challenged-by-bjp-stalwart-and-cpim-youth-front/ कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है, जहाँ बीजेपी के अनुभवी नेता और CPI(M) के युवा नेतृत्व ने तृणमूल कांग्रेस के मजबूत गढ़ों में कड़ी टक्कर दी है। चुनाव के दूसरे चरण में बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुबेंदु अधिकारी, स्वप्न दासगुप्ता, अर्जुन सिंह, और तपस रॉय जैसे दिग्गज मैदान में हैं। वहीं, बाएँ मोर्चे की तरफ से कलातन दासगुप्ता, मीनाक्षी मुखर्जी और दीप्सिता धर जैसे नई चेहरों ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस चरण में मुकाबला बेहद रोचक और निर्णायक होगा क्योंकि तृणमूल कांग्रेस ने पिछले कुछ वर्षों में यहाँ अपना दबदबा बनाया हुआ है। लेकिन बीजेपी और CPI(M) की संयुक्त चुनौती ने इस गढ़ को एक नई राजनीतिक लड़ाई के मैदान में बदल दिया है। सुबेंदु अधिकारी, जिन्होंने पिछले चुनावों में तृणमूल के खिलाफ मोर्चा संभाला था, इस बार भी अपनी सक्रियता से अपनी पार्टी का प्रभाव बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।

वहीं, CPI(M) की युवा टीम ने भी जनता के बीच अपनी पकड़ बनाने के लिए विभिन्न सामाजिक एवं विकासात्मक मुद्दों को प्राथमिकता दी है। मीनाक्षी मुखर्जी, जो युवा और शिक्षित वर्ग की बड़ी आवाज मानी जाती हैं, ने पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन के मुद्दों पर विशेष जोर दिया है। यह बदलाव इस क्षेत्र में राजनीतिक गतिरोध को तोड़ने का प्रयास माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस कोई भी कसर नहीं छोड़ रही है, और उसने भी अपने उम्मीदवारों की सूची में अनुभवी और लोकप्रिय चेहरे शामिल किए हैं। इस चुनाव के परिणाम पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करेंगे। आगामी दिन तय करेंगे कि जनता की मंशा किस तरफ है और किसे वे अपनी उम्मीदों का प्रतिनिधि मानते हैं।

निष्कर्षतः, पश्चिम बंगाल के इस दूसरे चरण के चुनाव में बीजेपी के दिग्गज और CPI(M) के युवा नेतृत्व ने तृणमूल के खिलाफ मिलकर चुनौती पेश की है, जो कि राज्य की राजनीति में नए इन्कलाब के संकेत दे रहे हैं। यह मुकाबला न सिर्फ राजनीतिक शक्ति का बल्कि जन भावना की सच्ची परीक्षा भी होगा।

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