imd – Jan Drishti News https://www.jandrishtinews.com jandrishtinews.com Fri, 05 Jun 2026 00:58:14 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://www.jandrishtinews.com/wp-content/uploads/2026/04/lodo-150x150.png imd – Jan Drishti News https://www.jandrishtinews.com 32 32 मानसून 2026: IMD के INSAT इमेजरी के साथ बादलों को कैसे ट्रैक करें https://www.jandrishtinews.com/2026/06/05/monsoon-2026-how-to-track-clouds-with-imds-insat-imagery/ Fri, 05 Jun 2026 00:58:14 +0000 https://www.jandrishtinews.com/monsoon-2026-how-to-track-clouds-with-imds-insat-imagery/ नई दिल्ली, स्थानीय संवाददाता। मानसून 2026 आ रहा है और इस बार मौसम विभाग ने मॉनसून की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए खास तकनीक अपनाई है। मानसून केवल जमीन पर गिरने वाली बारिश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पूर्वाभास के लिए यह जरूरी है कि हम उन तूफानों और बादलों को भी ट्रैक करें जो कि किमी ऊँचाई पर वायुमंडल में बनते हैं।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस बार अपने INSAT उपग्रहों की मदद से बादलों की चाल और उनकी बनावट को बारीकी से देखना शुरू किया है। INSAT इमेजरी से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग कर वे न सिर्फ बरसात की संभावना को बेहतर तरीके से बता सकेंगे, बल्कि तूफान, गरज-चमक और अन्य मौसम के बदलावों का भी सटीक पूर्वानुमान कर सकेंगे।

मानसून की शुरुआत और उसकी प्रेरणा वायुमंडलीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है, जो सीधे जमीन पर नज़र नहीं आतीं। मगर उन्नत उपग्रह तकनीक के कारण अब हम बादलों की ऊँचाई, घनत्व, और गति को देख सकते हैं। इससे न केवल किसानों और सामान्य जनता को पहले से सावधानी बरतने का मौका मिलता है, बल्कि सरकार और आपातकालीन सेवाओं को भी सही समय पर सूचना मिलती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि INSAT के माध्यम से प्राप्त डेटा से मौसम विभाग तूफान के केंद्र, विकास की प्रक्रिया और उनकी दिशा की भविष्यवाणी कर सकता है। यह तकनीक मौसम विज्ञान को एक नए स्तर पर ले जाती है जो पारंपरिक तरीकों से कहीं ज्यादा सटीक और प्रभावी है।

इस वर्ष मानसून की ट्रैकिंग में INSAT इमेजेशन की भूमिका को खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जलवायु परिवर्तन के चलते मौसम में अनिश्चितताएं बढ़ गई हैं। इस तकनीक की मदद से समय रहते अलर्ट जारी करके लाखों लोगों को नुकसान से बचाया जा सकता है।

संक्षेप में कहा जाए तो, मानसून केवल बारिश का मौसम नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत के लिए जीवनदायिनी ऋतु है। INSAT इमेजरी की मदद से मौसम विभाग की निगरानी में सुधार होने से हम मानसून की प्रकृति और उसके प्रभाव को बेहतर समझ पाएंगे, जिससे देश की जैविक, आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

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देखें: 2026 में 11 वर्षों में सबसे कठिन सूखा, कमजोर मानसून के कारण फसल उत्पादन पर गंभीर प्रभाव https://www.jandrishtinews.com/2026/06/04/watch-worst-drought-in-11-years-in-2026-severe-impact-on-crop-production-due-to-weak-monsoon/ Thu, 04 Jun 2026 01:52:38 +0000 https://www.jandrishtinews.com/watch-worst-drought-in-11-years-in-2026-severe-impact-on-crop-production-due-to-weak-monsoon/ नई दिल्ली। देश के कृषि क्षेत्र के लिए इस वर्ष कमजोर मानसून की संभावना ने चिंता की लकीरें खींच दी हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 2026 के मानसून को ‘अल्पवर्षा’ यानी डिफिशिएंट मानसून के रूप में वर्गीकृत किया है, जो पिछले 11 वर्षों में सबसे सूखे मानसून के संकेत दे रहा है। ऐसे में कृषि उत्पादन, जलस्रोत और कृषि अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित असर पर नजर रखना जरूरी है।

भारत की कृषि प्रणाली पर मानसून का भारी प्रभाव होता है क्योंकि अधिकांश किसान बारिश पर ही निर्भर होते हैं। कमजोर मानसून के कारण फसलों को पर्याप्त जलप्रवाह न मिल पाने से उत्पादन में गिरावट आ सकती है। इतिहास से पता चलता है कि जब भी मानसून कमजोर रहा है, खाद्य अनाज का उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे खाद्यान्न के दाम बढ़ने और किसानों की आय में कमी आई है।

साल 2014-15 के दौरान भी भारी अल्पवर्षा देखने को मिली थी, जिससे देश के कई राज्यों में जलसंसाधन गंभीर स्थिति में आ गए थे। जलाशयों का जलस्तर कम होने पर सिंचाई की क्षमता प्रभावित हुई, जिससे फसल कटाई पर विपरीत प्रभाव पड़ा। इस साल भी अगर मानसून आगामी महीनों में कमजोर रहता है, तो जलाशयों और नदियों में पानी की कमी हो सकती है, जो खेती और जलापूर्ति दोनों के लिए चुनौती बनेगी।

विशेषज्ञ बताते हैं कि कमजोर मानसून से न केवल खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का, और गन्ना की पैदावार घटेगी, बल्कि इससे किसान आर्थिक रूप से भी प्रभावित होंगे। वित्तीय संकट के चलते किसानों को बैंक लोन और कृषि संबंधी योजनाओं का लाभ लेना मुश्किल हो सकता है। इसके अतिरिक्त, खाद्यान्न उत्पादन में कमी आने से देश की खाद्य सुरक्षा पर भी चिंता बढ़ेगी।

हालांकि, इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न उपाय कर रही हैं। जल संरक्षण, स्मार्ट सिंचाई तकनीक, और सूखे प्रतिरोधी फसलों के विकास पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही, किसान क्रेडिट कार्ड, बीमा योजनाएं, और समर्थन मूल्य व्यवस्था को मजबूत कर किसानों को आर्थिक सहारा दिए जाने की कोशिश की जा रही है।

फसल उत्पादन पर कमजोर मानसून का असर कम करने के लिए सतत कृषि रणनीतियों को अपनाना और जल संरक्षण पर ज्यादा ध्यान देना आवश्यक होगा। किसानों को भी अपनी फसल योजना मानसून की स्तिथि के अनुसार समायोजित करनी होगी। इसके साथ ही, राष्ट्रीय खाद्य भंडार और जल स्रोतों का उचित प्रबंधन भी जरूरी है ताकि आगामी सूखा अवधि का प्रभाव न्यूनतम हो सके।

इस वर्ष का मानसून और कृषि क्षेत्र की स्थिति देश की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण संकेतक होंगी। सभी संबंधित पक्षों को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा ताकि किसी भी संभव खाद्य संकट से बचा जा सके। भारत की अन्नदाता प्रणाली की मजबूती इस बात पर निर्भर करेगी कि हम इस कमजोर मानसून के प्रभावों को किस प्रकार प्रबंधित करते हैं।

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इस वर्ष के मानसून से पहले IMD ने क्या घोषणा की? | विस्तार से जानें https://www.jandrishtinews.com/2026/05/14/what-did-imd-announce-before-this-years-monsoon-know-in-detail/ Thu, 14 May 2026 13:57:32 +0000 https://www.jandrishtinews.com/what-did-imd-announce-before-this-years-monsoon-know-in-detail/ भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मानसून कोर ज़ोन में आने वाले 15 राज्यों को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ये राज्य मानसून के दौरान अत्यधिक प्रभावित होते हैं, इसलिए इन्हें सबसे पहले ब्लॉक स्तर की मौसम की खबरें देने का निर्णय लिया गया है। इससे किसानों, स्थानीय प्रशासन और सामान्य जनता को बेहतर तैयारी का मौका मिलेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून कोर ज़ोन में ब्लॉक स्तर की पूर्वानुमान सेवा प्रदान करने की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि इस क्षेत्र में वर्षा का वितरण बढ़ते मौसम परिवर्तनों के चलते असमान होता जा रहा है। ब्लॉक स्तर पर सटीक पूर्वानुमान प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाता है और आपदा प्रबंधन में भी सहायक होता है।

मनसून कोर ज़ोन में आने वाले ये 15 राज्य हैं: महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक। इनके लिए ब्लॉक स्तर के पूर्वानुमान से स्थानीय कृषि गतिविधियों को बेहतर दिशा मिलेगी और बाढ़ या सुखाड़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की क्षमता बढ़ेगी।

IMD की ओर से इस पहल के तहत, प्रत्येक ब्लॉक में मौसम स्टेशन सेटअप किए जा रहे हैं, जो स्थानीय डेटा संग्रह करेंगे। यह डेटा केंद्र सरकार और राज्य सरकार को भी उपलब्ध कराया जाएगा ताकि वे तेजी से फैसले ले सकें। पिछले वर्षों में, ब्लॉक स्तर की पूर्वानुमान सेवाओं ने कृषि उत्पादन में सुधार किया है और ग्रामीण इलाकों में लाभ पहुंचाया है।

किसानों के लिए यह सेवा विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होगी क्योंकि वे अपने खेतों की तैयारी, बीज बोने, सिंचाई व खाद वितरण जैसे कार्य इसी मौसम पर निर्भर करते हैं। ब्लॉक के अनुसार मौसम की सही जानकारी उन्हें नुक्सान से बचाएगी और बेहतर उपज पाने में मदद करेगी।

साथ ही, मानसून कोर ज़ोन में मैदानी क्षेत्रों के अलावा पठारी एवं पहाड़ी क्षेत्र भी शामिल हैं जहां मौसम अधिक परिवर्तनशील होता है। ब्लॉक स्तर की पूर्वानुमान सेवा इन्हीं क्षेत्रों में तत्काल प्रभावी उपायों का संकेत दे सकेगी।

कुल मिलाकर, IMD की इस पहल से न केवल मौसम की असमानता का सामना करने में मदद मिलेगी बल्कि कृषि, जल प्रबंधन, आपदा नियंत्रण व अन्य सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी। यह कदम देश के मौसम विज्ञान में एक नई प्रगति का संकेत है, जो बढ़ती आबादी व जलवायु बदलाओं के बीच संतुलन बनाए रखने में सहायक होगा।

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दिल्ली में देर रात बारिश और तूफानी हवाओं का कहर; IMD ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट https://www.jandrishtinews.com/2026/05/05/late-night-rain-and-stormy-winds-wreak-havoc-in-delhi-imd-issued-orange-alert/ Tue, 05 May 2026 05:44:02 +0000 https://www.jandrishtinews.com/late-night-rain-and-stormy-winds-wreak-havoc-in-delhi-imd-issued-orange-alert/ नई दिल्ली: भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने दिल्ली में देर रात तेज बारिश और गरज के साथ तूफानी हवाओं की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने शहर में ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ बिजली चमकने और हवा की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँचने का अनुमान है।

मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में यह मौसम की स्थिति आम तौर पर अगले 24 घंटों तक बनी रह सकती है। इससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है, इसलिए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से वाहन चालकों और बाहर रहने वाले व्यक्तियों को तेज़ हवा और भारी बारिश से बचने के लिए सचेत रहने की आवश्यकता है।

मौसम विशेषज्ञों ने कहा कि हाल के दिनों में उत्तर भारत के कई हिस्सों में आ गई मानसून की सक्रियता के कारण इस तरह के तूफानी दौर और बारिश के सत्र देखे जा रहे हैं। दिल्ली में भी मानसून ने अपनी शुरुआत कर दी है, जिससे नमी और गरज-चमक के साथ बारिश जारी रहने की संभावना है।

IMD ने सभी संबंधित विभागों को तैयार रहने और आपातकालीन सेवाओं को सजग रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, नागरिकों को अलर्ट रहते हुए अनावश्यक बाहर निकलने से बचने, बिजली की चपेट में आने से बचने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह भी दी गई है।

मौसम विभाग का यह ऑरेंज अलर्ट महत्वपूर्ण सुरक्षा संकेत है, जिसका पालन कर मौसम की विषम परिस्थितियों का सामना किया जा सकता है। लोगों से अनुरोध है कि वे मौसम अपडेट्स लगातार देखें और मौसम विभाग द्वारा जारी निर्देशों का ध्यानपूर्वक पालन करें।

इस बीच, दिल्ली में मौसम में आए इस बदलाव के कारण तापमान में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जिससे गर्मी कम होने के साथ-साथ कुछ इलाकों में मौसम सुहाना भी रहेगा।

मौसम विभाग की ओर से जारी इस चेतावनी के मद्देनजर राजधानी के लोगों को सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को टाला जा सके।

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