mea – Jan Drishti News https://www.jandrishtinews.com jandrishtinews.com Thu, 04 Jun 2026 01:52:45 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://www.jandrishtinews.com/wp-content/uploads/2026/04/lodo-150x150.png mea – Jan Drishti News https://www.jandrishtinews.com 32 32 सपर्क सीमाओं के मामले में तीसरे पक्ष के लिए कोई जगह नहीं: विदेश मंत्रालय ने नेपाल के प्रधानमंत्री के साथ देश की शासकीय पार्टी प्रमुख के संदर्भ में उत्तर दिया https://www.jandrishtinews.com/2026/06/04/there-is-no-room-for-third-parties-in-the-matter-of-contact-boundaries-external-affairs-ministry-responded-to-the-prime-minister-of-nepal-with-reference-to-the-head-of-the-countrys-ruling-party/ Thu, 04 Jun 2026 01:52:45 +0000 https://www.jandrishtinews.com/there-is-no-room-for-third-parties-in-the-matter-of-contact-boundaries-external-affairs-ministry-responded-to-the-prime-minister-of-nepal-with-reference-to-the-head-of-the-countrys-ruling-party/ नई दिल्ली। भारत सरकार के मंत्रालय ऑफ़ इन्फॉर्मेशन एंड पब्लिक रिलेशंस (MEA) के प्रवक्ता ने हाल ही में बालेन शाह द्वारा पूर्व में की गई boundary issue प्रस्तावना पर जवाब दिया है। बालेन शाह ने यह दावा किया था कि भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद जटिल है, क्योंकि दोनों देशों के पास एक-दूसरे की कुछ जमीनों पर कब्जा है। साथ ही, उन्होंने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए ब्रिटेन और चीन की मध्यस्थता की मांग भी की थी।

MEA के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि भारत और नेपाल के बीच सीमाओं को लेकर कोई तीसरा पक्ष मध्यस्थ के रूप में शामिल नहीं होगा। भारत पूरी तरह से मानता है कि दोनों देश द्विपक्षीय बातचीत और समझौते के जरिए ही किसी भी सीमा विवाद का समाधान निकाल सकते हैं। प्रवक्ता ने कहा, “भारत और नेपाल के बीच अच्छी दोस्ताना और परस्पर सम्मान आधारित संबंध हैं। सीमा मुद्दों को लेकर दोनों पक्षों के बीच नियमित बातचीत होती रहती है।”

उन्होंने आगे कहा, “सीमा विवाद जटिल हो सकता है, लेकिन यह मुद्दा केवल भारत और नेपाल के बीच ही सुलझाया जाएगा, किसी और देश की दखलंदाजी से हम बिलकुल भी सहमत नहीं हैं।” इस बयान को भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट संदेश के तौर पर पेश किया कि वे किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करेंगे और यह सीमा विषय दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय तौर पर सुलझाया जाना चाहिए।

नेपाल के प्रधानमंत्री और देश की शासकीय पार्टी के प्रमुख जब भारत की राजधानी में थे, तब भी सीमा मामलों पर चर्चा हुई, जिसमें भारत ने दोनों देशों के बीच शांति और समझ की भावना को बनाए रखने पर बल दिया। इस दौरान भारत ने यह जताया कि किसी भी तरह की सीमा मुद्दे की संवेदनशीलता को समझते हुए संयम और बातचीत जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा विवादों को सुलझाने में दोनों देशों के समन्वय और विश्वास की आवश्यकता होती है। ऐसे में तीसरे पक्ष की दखलंदाजी विवाद को और जटिल बना सकती है। भारत सरकार का यह स्पष्ट रुख दर्शाता है कि वह अपनी विदेश नीति में नैतिकता और द्विपक्षीय विश्वास को प्राथमिकता देती है।

इस पूरे परिप्रेक्ष्य में यह स्पष्ट हो जाता है कि भारत और नेपाल के बीच सीमाओं के मुद्दे पर तीसरे पक्ष को शामिल करना न केवल अप्रशंसनीय है, बल्कि इससे द्विपक्षीय संबंधों को भी नुकसान पहुंच सकता है। दोनों देशों के लिए बेहतर होगा कि वे संवाद और आपसी सम्मान की भावना के साथ इस मसले का हल खोजें।

बताते चलें कि सीमा विवाद दक्षिण एशिया के कई हिस्सों में पाई जाती है, और इसमें स्पष्टता और संवेदनशीलता की जरूरत होती है। भारत और नेपाल की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। इस संदर्भ में MEA का यह उत्तर न केवल नीति की पुष्टि करता है, बल्कि दोनों देशों के बीच सौहार्द बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी जाहिर करता है।

इस पूरे मामले की अपडेट दिल्ली और काठमांडू दोनों से लगातार मिलती रहेगी, जिससे स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट होती रहेगी। फिलहाल, भारत अपने पड़ोसी देश के साथ मजबूत रिश्ता बनाने और क्षेत्रीय सौहार्दता बनाए रखने में जुटा हुआ है।

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