tmc – Jan Drishti News https://www.jandrishtinews.com jandrishtinews.com Wed, 10 Jun 2026 09:30:35 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://www.jandrishtinews.com/wp-content/uploads/2026/04/lodo-150x150.png tmc – Jan Drishti News https://www.jandrishtinews.com 32 32 सुष्मिता देव ने TMC छोड़ा, दिल्ली में हिमंता से की मुलाकात, राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के संकेत https://www.jandrishtinews.com/2026/06/10/sushmita-dev-leaves-tmc-meets-himanta-in-delhi-signs-of-change-in-political-equations/ Wed, 10 Jun 2026 09:30:35 +0000 https://www.jandrishtinews.com/sushmita-dev-leaves-tmc-meets-himanta-in-delhi-signs-of-change-in-political-equations/ नई दिल्ली: आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक नए झटके का सामना करना पड़ा है, जब राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने बुधवार को न केवल राज्यसभा से अपने इस्तीफे की घोषणा की बल्कि पार्टी की प्राथमिक सदस्यता भी समाप्त कर दी। यह कदम पार्टी के भीतर उठ रहे असंतोष और राजनीतिक संकट को और गहरा करता दिख रहा है।

सुष्मिता देव के इस्तीफे के कुछ ही देर बाद वे दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मिलीं, जिससे उनके बीजेपी में शामिल होने की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है। इस मिलन से भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों ही दलों की राजनीतिक रणनीतियों पर असर पड़ने की संभावना है।

यह घटना ऐसे समय आई है जब तृणमूल कांग्रेस को पूर्वांचल के बाहर अपने राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है। इससे पहले 8 जून को वरिष्ठ तृणमूल नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने भी राज्यसभा और पार्टी से एक साथ इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने पश्चिम बंगाल में पार्टी की सार्वजनिक लोकप्रियता में गिरावट को कारण बताया था।

रॉय ने भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अपराध, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, औद्योगिक विकास, रोजगार और कानून-व्यवस्था में गिरावट जैसी कई गंभीर समस्याओं का हवाला देते हुए अपने इस्तीफे की वजह बताई थी। उनकी यह आलोचना पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हुई थी।

सुष्मिता देव असम के एक प्रभावशाली राजनेता के रूप में जानी जाती हैं और वे वरिष्ठ कांग्रेस नेता स्व. संतोष मोहन देव की बेटी हैं, जिन्होंने राजीव गांधी, पी.वी. नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल में केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में कार्य किया।

अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से करने वाली सुष्मिता देव ने 2014 से 2019 तक असम की सिलचर लोकसभा सीट से सांसद के रूप में सेवा की। वे 2019 में बीजेपी के राजदीप रॉय से चुनाव हार गईं। अगस्त 2021 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस में शामिल होकर पार्टी के लिए नई उम्मीदें जगाईं।

ममता बनर्जी ने उन्हें प्रमुख रूप से पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर असम में पार्टी का विस्तार करने का जिम्मा दिया था। इसके तहत उन्होंने कई बार सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने अक्टूबर 2021 से अगस्त 2023 तक राज्यसभा में शोधकालीन अवधि हेतु काम किया और अप्रैल 2024 में फिर से चुनी गईं, लेकिन छह वर्ष की अवधि पूरी करने से पहले इस्तीफा दे दिया।

हालांकि उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे की विशेष वजहों का सार्वजनिक तौर पर खुलासा नहीं किया है, लेकिन उनकी हिमंता सरमा से मुलाकात ने अगली राजनीतिक दिशा को लेकर विभिन्न अटकलें तेज कर दी हैं। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस के सामने एक नए राजनीतिक संघर्ष के संकेत भी मिलने लगे हैं।

विशेष रूप से, यह घटनाक्रम उस वक्त सामने आया है जब पार्टी कई उच्च पदस्थ नेताओं के अलग होने की चुनौती से जूझ रही है, जो पार्टी के लिए आने वाले दिनों को कई मायनों में चुनौतीपूर्ण बना सकता है।

आईएएनएस की रिपोर्ट के साथ

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फलटा विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगिर खान ने चुनाव पद से नामांकन वापस लिया https://www.jandrishtinews.com/2026/05/20/trinamool-congress-candidate-from-falta-assembly-seat-jahangir-khan-withdrew-his-nomination-from-the-election-post/ Wed, 20 May 2026 03:36:02 +0000 https://www.jandrishtinews.com/trinamool-congress-candidate-from-falta-assembly-seat-jahangir-khan-withdrew-his-nomination-from-the-election-post/ कोलकाता, 27 अप्रैल 2024: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के फलटा विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार जहांगिर खान ने आगामी पुनः चुनाव से अपना नामांकन वापस लेने का फैसला किया है। पार्टी ने इस कदम की निंदा की है और स्पष्ट किया कि यह निर्णय पार्टी का नहीं बल्कि जहांगिर खान की व्यक्तिगत पसंद है।

जानकारी के अनुसार, चुनाव आयोग द्वारा फलटा सीट पर पुनः मतदान का आयोजन किया जा रहा है। जहांगिर खान ने चुनाव केंद्र से अचानक नाम वापस लेने का निर्णय लिया, जिससे स्थानीय और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने बयान दिया कि पार्टी पूरी तरह से इस पुनः चुनाव में उतावली से शामिल है और उसकी तैयारी पूरी है। हालांकि, जहांगिर खान ने अपनी व्यक्तिगत वजहों को बताकर चुनाव मैदान से बाहर होने का विकल्प चुना है।

पार्टी के प्रवक्ता ने कहा, “जहांगिर खान का नामांकन वापस लेना उनकी निजी पसंद है, तृणमूल कांग्रेस इस निर्णय का समर्थन या अनुमोदन नहीं करती। हम पूरी तरह से प्रत्याशी और पार्टी के हित में काम कर रहे हैं और क्षेत्र में मजबूत उम्मीदवार प्रस्तुत करेंगे।”

फलटा विधानसभा क्षेत्र को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों की नज़रें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह सीट पिछले चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की पकड़ मजबूत रही है। इस क्षेत्र से उपजी खबरों के अनुसार, जिले में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच इस चुनाव को लेकर उत्साह है, बावजूद इसके कि विधान सभा चुनाव के पुनः होने वाले इस चरण में उम्मीदवारों के नाम में बदलाव देखा जा रहा है।

जहांगिर खान के नामांकन वापस लेने से विपक्षी दलों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। कुछ दलों ने इस फैसले को राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना तो कुछ ने इसे पार्टी के आंतरिक मतभेद के रूप में देखा। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि पूरे क्षेत्र में उनका समर्थन मजबूत बना हुआ है और पार्टी पुनः चुनाव में पूरी ताकत से उतरेगी।

फलटा विधानसभा क्षेत्र में आगामी पुनः चुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस जल्द ही नए उम्मीदवार का ऐलान करेगी। यह घोषणा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष या वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा की जा सकती है। आगामी चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन और जहांगिर खान के इस फैसले का क्षेत्र की राजनीति पर क्या असर पड़ता है, यह देखना बाकी है।

यह निर्णय राजनीतिक दलों और मतदाताओं दोनों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक स्थिरता और विकास योजनाओं पर असर डाल सकता है। कथित तौर पर, पार्टी का मानना है कि उनके तरफ से सही उम्मीदवार के चयन से वे इस क्षेत्र में फिर से अपनी पकड़ मजबूत कर पाएंगे।

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बाइनरी के परे: क्यों बंगाल के चुनाव परिणाम ध्रुवीकरण की कहानी को चुनौती देते हैं https://www.jandrishtinews.com/2026/05/05/beyond-the-binary-why-bengal-election-results-challenge-the-polarization-narrative/ Tue, 05 May 2026 17:55:31 +0000 https://www.jandrishtinews.com/beyond-the-binary-why-bengal-election-results-challenge-the-polarization-narrative/ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम राजनीतिक विश्लेषकों के लिए कई मायनों में आश्चर्यजनक रहा है। इस बार के चुनाव में परंपरागत ध्रुवीकरण की रणनीतियों को नकारते हुए, परिणामों ने एक नया राजनीतिक परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत किया है। विशेष रूप से, यह देखा गया कि जीत के अंतर अक्सर अल्पसंख्यक वोटों से कहीं अधिक व्यापक थे, जो राज्य की चुनावी स्थिति की जटिलता को दर्शाता है।

विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को स्थानीय स्तर पर भारी विरोध का सामना करना पड़ा, जो पार्टी के वर्तमान कार्यकाल से असंतोष को उजागर करता है। हालांकि, विभिन्न समुदायों के मजबूत गठबंधन के बावजूद, यह विरोध तृणमूल की पकड़ को कमजोर करने में प्रमुख भूमिका निभाया। कई क्षेत्रों में, भले ही सामाजिक और धार्मिक समुदायों ने TMC का समर्थन किया हो, परन्तु स्थानीय स्तर पर विरोध की भावना अधिक प्रबल रही जिससे पार्टी की स्थिति प्रभावित हुई।

विश्लेषकों के अनुसार, यह परिदृश्य दिखाता है कि बंगाल की राजनीति सिर्फ साम्प्रदायिक आधार पर संकुचित नहीं है। स्थानीय समस्याएं, प्रशासनिक कार्यशैली तथा क्षेत्रीय मुद्दों ने भी मतदाताओं के निर्णयों में अहम भूमिका निभाई। चुनाव परिणामों ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि ध्रुवीकरण के पार जाकर मतदाता अपने व्यक्तिगत एवं सामूहिक हितों के आधार पर फैसले कर रहे हैं।

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, कई सीटों पर जीत का अंतर इस तथ्य को पुष्ट करता है कि समुदायों के बीच मत विभाजन के अलावा भी व्यापक राजनीतिक रुझान मौजूद हैं। यह चुनाव बंगाल की राजनीति में बहुलता और विविधता की जटिलताओं को दर्शाता है, जो भविष्य के लिए राजनीतिक दलों के लिए रणनीति बनाने में नई चुनौतियां और अवसर लेकर आएगा।

निष्कर्षतः, पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम ध्रुवीकरण के सरल पक्षों से कहीं अधिक जटिल और गहन हैं। यह एक संकेत है कि मतदाता बदलते समय के साथ अधिक सूक्ष्म एवं सचेत राजनैतिक निर्णय लेने लगे हैं, जो राज्य की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।

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