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Why ESIC decided to directly run new hospitals: The West Bengal trigger
ईएसआईसी ने नए अस्पताल सीधे चलाने का फैसला क्यों किया: पश्चिम बंगाल की ट्रिगर
As countries urbanise, 38% of world's population will live in large cities by 2100: Study
जैसे-जैसे देश शहरीकरण की ओर बढ़ेंगे, 2100 तक दुनिया की 38% आबादी बड़े शहरों में रहेगी: अध्ययन
'Disbelief' in India camp after a failure to adapt to 'fantastic' Ireland
भारत के कैंप में ‘आश्चर्य और असमंजस’ ने लिया जन्म, ‘शानदार’ आयरलैंड के खिलाफ अनुकूलन में नाकामी
Only 10.2% women fielded in 20 Assembly polls since passage of women’s Bill in 2023: report
सिर्फ 10.2% महिलाएं ही मैदान में उतरीं, 2023 में महिला विधेयक पारित होने के बाद 20 विधानसभा चुनावों में: रिपोर्ट
Through The Magnificent Life, artist Rajesh RV imagines a world of harmony and hope
महान जीवन के माध्यम से, कलाकार राजेश आरवी ने सौहार्द और उम्मीद की दुनिया की कल्पना की
Ancient Aaykkudi Temple Discovered in Vizhinjam | Kerala Temple History
विजीनजं में प्राचीन अय्यकुडी मंदिर की खोज | केरल मंदिर इतिहास
It’s a bad idea to scratch bug bites, research says
कीट के काटने पर खुजलाना एक गलत कदम है, शोध में बताया गया
What decides your height?
क्या निर्धारित करता है आपकी ऊंचाई
Why is pregnancy sickness drug not easily accessible to all?
गर्भावस्था के दौरान बीमारी की दवा सभी के लिए उपलब्ध क्यों नहीं है
‘Bengaluru’s bookstores bring people a little closer to calling this city their own’

बेंगलुरु: शहर की पढ़ने की समुदाय ने अपनी एक खास पहचान बनाने के लिए एकजुट होकर ‘‘द बुकवर्म’’ नामक लोकप्रिय पुस्तकालय को दोबारा जीवित करने की पूरी कोशिश कर रही है। यह पहल न केवल किताबों के प्रति शहरवासियों की गहरी लगाव को दर्शाती है, बल्कि बेंगलुरु की सांस्कृतिक और बौद्धिक संपन्नता के बड़े चित्र को भी उजागर करती है।

‘‘द हिन्दु’’ की रिपोर्ट के अनुसार, बुकवर्म की इस पुनरुत्थान यात्रा का समर्थन कई स्थानीय पाठकों, लेखकों और किताब प्रेमियों द्वारा किया जा रहा है। कोविड-19 महामारी के दौरान और उसके बाद कई छोटे व्यवसायों की तरह इस पुस्तकालय को भी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जिससे इसके संचालन में बाधा आई। लेकिन बेंगलुरु के साहित्यिक समुदाय ने इसे बंद होने से बचाने का बीड़ा उठाया है।

बुकवर्म के पुनः संचालन के प्रयासों में शामिल व्यक्ति बताते हैं कि सिर्फ एक किताबों की दुकान से कहीं अधिक यह जगह बेंगलुरु की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। यहां न केवल किताबें मिलती हैं, बल्कि विभिन्न साहित्यिक चर्चाएं, कार्यशालाएं और समुदाय के साथ संवाद का एक मंच भी उपलब्ध होता है।

पाठकों और स्थानीय कलाकारों के बीच ‘‘द बुकवर्म’’ ने वर्षों से एक मजबूत बंधन बनाया है। यह स्थान न सिर्फ किताबों की बिक्री केंद्र है, बल्कि एक सामुदायिक केंद्र के रूप में भी काम करता है, जो शहर के सांस्कृतिक विकास में अपनी भुमिका निभा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे पुस्तकालय और किताबों की दुकानों का अस्तित्व शहर के सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह न केवल ज्ञान की पहुँच को बढ़ाता है, बल्कि नागरिकों को अपने शहर के प्रति जुड़ाव भी महसूस कराता है।

इस पहल के तहत, ‘‘द बुकवर्म’’ ने कई डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अपने वर्गों और कार्यक्रमों को भी ऑनलाइन कर दिया है, जिससे साझा ज्ञान को और अधिक लोगों तक पहुँचाना संभव हो पाया है।

‘‘बेंगलुरु की पुस्तकों से जुड़ी यह पहल दिखाती है कि एक शहर की असली सांस्कृतिक अस्मिता उसके लोगों के साझा प्रयासों से ही मजबूत होती है। जब समुदाय मिलकर किसी लक्ष्य के प्रति समर्पित होता है, तो वह किसी भी चुनौती को पार कर सकता है।’’ — द हिन्दु

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