नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2024: गर्मी के मौसम में अक्सर ‘हीटवेव’ शब्द का काफी चर्चा होती है। आम धारणा यह है कि हीटवेव एक प्रकार की गर्मी की लहर होती है जो वातावरण में फैलती है, लेकिन विज्ञान इसकी व्याख्या कुछ और ही करता है। वायुमंडलीय वैज्ञानिकों के अनुसार, हीटवेव वास्तव में एक लंबी अवधि तक तापमान में बढ़ोतरी होती है, जिसे उच्च दबाव प्रणाली (high-pressure systems) के स्थिर बने रहने के कारण उत्पन्न माना जाता है।
हीटवेव तब होता है जब किसी क्षेत्र में कई दिनों तक औसत से काफी अधिक तापमान दर्ज होता है। यह अत्यधिक तापमान अक्सर स्थिर उच्च दबाव के कारण होता है जो वातावरण में हवा के प्रवाह को रोकता है और गर्म हवा को जमीनी सतह के पास दबा देता है। इस प्रक्रिया से धरती की सतह ज्यादा गर्म होती जाती है, और तापमान लगातार बढ़ता रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हीटवेव को केवल एक ‘गर्मी की लहर’ कहना पूरी तरह से सही नहीं है क्योंकि यह कोई गतिमान लहर नहीं होती जो गति से आगे बढ़ती हो। बल्कि यह एक स्थिति है जो निर्धारित मौसम प्रणालियों की वजह से बनी रहती है। यह लम्बे समय तक स्थिर रहती है और कभी-कभी सप्ताहों या महीनों तक भी जारी रह सकती है।
भारत में गर्मी के मौसम में अक्सर हीटवेव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, खासकर मई और जून में जब सूर्य की किरणें सबसे तीव्र होती हैं। फसल, जल स्रोत, और लोगों के स्वास्थ्य पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है। मौसम विभाग द्वारा जारी की गई चेतावनियाँ और सावधानियां जनता को इस स्थिति से बचाव के लिए निर्देश देती हैं।
इसलिए, हीटवेव को केवल एक ‘गर्मी की लहर’ के रूप में देखने के बजाय इसे एक meteorological घटना के रूप में समझना आवश्यक है जो स्थिर उच्च दबाव प्रणालियों के कारण अत्यधिक तापमान प्रदर्शित करती है। इस समझ से हम हीटवेव की चुनौतियों का बेहतर सामना कर सकते हैं और सावधानी बरत सकते हैं।

