नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 134वें ‘मन्न की बात’ कार्यक्रम में एक दिल छू लेने वाली घटना का जिक्र किया, जिसमें एक डॉल्फिन को बचाने के लिए की गई 13 घंटे लंबी बचाव ऑपरेशन की वीडियो को साझा करते हुए उसकी प्रशंसा की। इस वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे एक डॉल्फिन जो एक नहर में फंसी हुई थी, उसे सुरक्षित रूप से बाहर निकाला, उपचार दिया गया और अंततः राप्ती नदी में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
पीएम मोदी ने कहा कि यह ऑपरेशन मानवता और समर्पण की एक जीवंत मिसाल है। उन्होंने बताया कि डॉल्फिन को बचाने के लिए जिस एम्बुलेंस का उपयोग किया गया था, वह पूरी तरह से उस उद्देश्य के लिए समर्पित थी, जिसे देखकर लोगों में जागरूकता फैली। इस बाइक-एम्बुलेंस ने डॉल्फिन को अस्पताल तक पहुँचाने और उपचार कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा, “इस जरूरी कार्य को अंजाम देने वाले सभी कर्मचारियों और पशु चिकित्सकों को मेरा सलाम। उनकी प्रतिबद्धता और मेहनत से प्रकृति के इस अनमोल जीव को नई जिंदगी मिली।”
डॉल्फिन के सुरक्षित रिहा होने से पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव संवर्धन की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञ भी इस बचाव अभियान की प्रशंसा कर रहे हैं, क्योंकि इससे यह साबित होता है कि उचित संसाधन और समर्पण से वन्य जीवों की रक्षा संभव है।
राप्ती नदी में डॉल्फिन की वापसी ने स्थानीय समुदायों में भी उत्साह और गर्व की भावना जगाई है। लोग इस अभियान को प्रेरणादायक मानते हुए, वन्यजीव संरक्षण में अधिक सहभागिता का संकल्प ले रहे हैं।
मन्न की बात में प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि इंसान और प्रकृति के बीच सह-अस्तित्व जरूरी है, और हमें अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए कदम उठाने चाहिए। डॉल्फिन बचाव अभियान जैसे उदाहरण पूरे देश के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
यह घटना इस बात की ओर ध्यान आकर्षित करती है कि छोटी-छोटी कोशिशें भी बड़े बदलाव ला सकती हैं, यदि हम सभी मिलकर काम करें। स्थानीय प्रशासन से लेकर आम जनता तक, हर किसी की भूमिका महत्वपूर्ण है।
इसके साथ ही, यह भी स्पष्ट होता है कि तकनीकी और संसाधनों का सही उपयोग कर वन्य जीवों के संरक्षण में उल्लेखनीय परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

