एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण खोज की है, जिससे एंडोमेट्रियोसिस नामक महिलाओं में होने वाली एक दर्दनाक स्थिति का जल्द और आसान निदान संभव हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस स्थिति वाले मरीजों के शरीर में एक विशिष्ट हार्मोन पैटर्न पाया जाता है, जिसे रक्त परीक्षण के माध्यम से पहचाना जा सकता है।
एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भाशय की आंतरिक झिल्ली (एंडोमेट्रियम) अन्य अंगों में बढ़ने लगती है, जिससे तेज दर्द, बांझपन और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। अक्सर इसका निदान कई महीनों या वर्षों तक देरी से होता है क्योंकि वर्तमान में इसका पता लगाने के लिए मुख्यतः शल्य चिकित्सा और बायोप्सी जैसी इनवेसिव प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है।
एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने बताया कि उन्होंने एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाओं के रक्त में हार्मोनल बदलावों का अध्ययन किया और पाया कि इन महिलाओं के हार्मोन प्रोफाइल में एक खास पैटर्न मौजूद है जो दूसरों से अलग है। यह खोज न केवल निदान की प्रक्रिया को आसान बनाएगी बल्कि संभावित रूप से इसे कम खर्चीला और कम दर्दनाक भी बनाएगी।
शोध दल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “हमारे परिणाम बताते हैं कि एंडोमेट्रियोसिस के लिए रक्त परीक्षण एक प्रभावी स्क्रीनिंग टूल हो सकता है। इससे महिलाओं को जल्दी और सही उपचार मिलने में मदद मिलेगी, जिससे उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार होगा।”
यह खोज एंडोमेट्रियोसिस के निदान में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है, क्योंकि आज तक महिलाओं को कई बार गलत निदान और ट्रीटमेंट के साथ जूझना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस शोध के बाद आने वाले वर्षों में फिलहाल के तरीके बदल सकते हैं और अधिक महिला केंद्रित और संवेदनशील निदान उपलब्ध हो पाएगा।
इस संबंध में कि आगे की क्या योजना है, शोधकर्ताओं ने कहा कि वे इस रक्त परीक्षण को व्यापक पैमाने पर जांचने के लिए और शोध कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह हर जनसंख्या में प्रभावी और भरोसेमंद हो। साथ ही, इस परीक्षण के व्यावसायिक उपयोग के लिए जरूरी मंजूरी और तकनीकी विकसित की जाएगी।
एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाओं और उनके परिवारों के लिए यह उम्मीद की एक नई किरण लेकर आया है, कि भविष्य में उनकी समस्या का निदान तेज़, सरल और कम कष्टकारी होगा।

