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नई दिल्ली, 16 जुलाई 2026। निजी अंतरिक्ष प्रक्षेपण कंपनी Skyroot Aerospace ने आज अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि की घोषणा की है। कंपनी ने बताया कि उसका पहला निजी विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट ‘विक्रम-1’ 18 जुलाई को प्रक्षेपण के लिए तैयार है। यह लॉन्च भारत के पहले निजी अंतरिक्ष बंदरगाह के लॉन्च पैड नंबर एक से सुबह 11:30 बजे किया जाएगा।

Skyroot Aerospace के अनुसार, विक्रम-1 भारत का पहला पूर्णत: निजी क्षेत्र में विकसित किया गया ऑर्बिटल क्लास रॉकेट है, जो भारतीय अंतरिक्ष शोध संगठन (ISRO) द्वारा संचालित सार्वजनिक प्रक्षेपणों से अलग एक नई दिशा खोलता है। इस रॉकेट का उद्देश्य छोटे उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करना है, जिससे भारत के साथ-साथ वैश्विक बाजार में भी निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।

कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया, “विक्रम-1 की सफलता से भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र का स्वरूप बदलेगा। यह न केवल भारतीय उपग्रह प्रक्षेपण नेटवर्क को मजबूत करेगा, बल्कि घरेलू उद्योगों को भी अंतरिक्ष तकनीक में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।”

विक्रम-1 रॉकेट का डिजाइन उच्च दक्षता और पर्यावरण के अनुकूल प्रणालियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। यह रॉकेट हल्के भार के उपग्रहों को सस्ती लागत पर पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने में सक्षम होगा। इस पहल से भारत के युवा वैज्ञानिकों और तकनीशियनों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।

भारतीय अंतरिक्ष उद्योग में निजी उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के तहत, Skyroot Aerospace की यह पहल देश की अंतरिक्ष यात्रा में एक नयी क्रांति को जन्म देने वाले कदम साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण से भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेशकों का विश्वास भी बढ़ेगा।

विक्रम-1 के प्रक्षेपण की तैयारियों को लेकर सभी सुरक्षा मानकों और अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों का ध्यान रखा गया है। लॉन्चिंग स्थल पर आवश्यक परीक्षण और तकनीकी जांच पूरी हो चुकी है और अंतिम तैयारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

इस प्रक्षेपण को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए Skyroot Aerospace ने कई विशेषज्ञों और तकनीकी टीमों के साथ साझेदारी की है, जो इस क्षेत्र में वर्षों का अनुभव रखती हैं। आने वाले दिनों में विक्रम-1 के जरिए भारत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अलग पहचान स्थापित करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

Skyroot Aerospace के इस महत्वाकांक्षी कदम से यह स्पष्ट होता है कि भारत अब अंतरिक्ष क्षेत्र में केवल सरकार द्वारा नियंत्रित परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निजी क्षेत्र की भागीदारी भी अंतरिक्ष खोज को नई ऊचाइयों तक पहुंचाएगी। यह अभियान न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।

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