नई दिल्ली। अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) ने वित्त वर्ष 2027 तक अपने बैटरी स्टोरेज क्षमता में 10 गीगावाट का विस्तार करने के लिए 15,000 करोड़ रुपए निवेश करने की घोषणा की है। कंपनी ने यह जानकारी हाल ही में अपनी तिमाही आय कॉल के दौरान दी। इस निवेश का उद्देश्य ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में अपनी सुविधाओं का विस्तार करना और पवन तथा सौर ऊर्जा के स्थिर उत्पादन को सुनिश्चित करना है।
कंपनी ने बताया कि यह नया जोड़ा गया स्टोरेज क्षमता मौजूदा लगभग तीन गीगावाट घंटे (GWh) की स्थापित क्षमता से ऊपर होगी, जिसे वह वित्त वर्ष 2026 के दौरान 1.4 GWh की सुविधाओं के कमीशनिंग के बाद प्राप्त करने की उम्मीद कर रही है। अडानी ग्रीन के इस कदम को ऊर्जा क्षेत्र में बड़े परिवर्तन और अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी लाने के संदर्भ में देखा जा रहा है।
विश्लेषकों ने कंपनी की इस योजना को सकारात्मक कदम बताया है, जो भारत में साफ ऊर्जा समाधान को बढ़ावा देने और ऊर्जा संरक्षण को सुदृढ़ करने में सहायक साबित होगा। इससे न केवल ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता आएगी, बल्कि चरम मौसम की स्थिति में भी ऊर्जा उपलब्ध कराई जा सकेगी।
अडानी ग्रीन के सीईओ ने कहा, ‘हमारी यह नई पहल राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा स्वावलंबन की दिशा में एक बड़ी छलांग है। 10 गीगावाट की बैटरी स्टोरेज क्षमता से हम पवन-सौर जैसे नवीकरणीय स्रोतों की अनिश्चितता को कम कर सकेंगे और निरंतर ऊर्जा आपूर्ति को सुनिश्चित कर सकेंगे।’
वर्तमान में अडानी ग्रीन भारत के प्रमुख अक्षय ऊर्जा उत्पादकों में से एक है और 20 गीगावाट से अधिक की स्थापित ऊर्जा उत्पादन क्षमता रखती है। कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा भंडारण के महत्व पर विशेष ध्यान दिया है और इस क्षेत्र में निवेश बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती जनसंख्या और ऊर्जा की मांग को ध्यान में रखते हुए, देश को स्मार्ट ग्रिड्स और उन्नत ऊर्जा भंडारण तकनीकों की आवश्यकता है। अडानी ग्रीन का यह निवेश इस दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
यह पहल भारत के ऊर्जा संक्रमण लक्ष्य, खास तौर पर 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी। सरकार की विभिन्न योजनाओं के साथ मिलकर ऐसे प्रोजेक्ट्स देश की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए फायदेमंद होंगे।
अडानी ग्रीन की योजना से सेक्टर में प्रतियोगिता बढ़ेगी और नई तकनीकों के अनुप्रयोग को बढ़ावा मिलेगा। इन सबके चलते भारत वैश्विक अक्षय ऊर्जा बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।

