नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग बलात्कार पीड़ितों के गर्भपात के समय सीमा को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) नवीन सिखरोल ने कहा कि राज्य सरकारें और डॉक्टर ऐसे मामलों में समय सीमा निर्धारित नहीं कर सकते, बल्कि यह निर्णय कानून के अनुसार होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि नाबालिग पीड़ितों के मामले में बेहतर सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए दंड संहिता में संशोधन की आवश्यकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान मांग की कि बलात्कार के मामलों में तेज सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए कानून में बदलाव किए जाएं। CJI ने कहा कि ऐसे मामलों की ट्रायल प्रक्रिया सप्ताह के भीतर पूरी होनी चाहिए, ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय मिले और वे सामाजिक रूप से सुरक्षित महसूस कर सकें। अदालत ने यह भी प्रस्ताव रखा कि आरोपी की संपत्ति को पीड़ित के नाम हस्तांतरित किया जाना चाहिए, जिससे पीड़ित की आर्थिक मदद हो सके।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब नाबालिगों के खिलाफ हुए यौन अपराधों पर समाज और सरकार दोनों की नजरें टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पीड़ितों की सुरक्षा की दिशा में एक प्रभावशाली प्रयास है। सुप्रीम कोर्ट के सुझावों को केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों के समक्ष रखा जाएगा, ताकि जल्द से जल्द आवश्यक कानूनी बदलाव लागू किए जा सकें।
कानून विशेषज्ञों ने इस फैसले को प्रशंसनीय बताया है और कहा है कि इससे ऐसी आपराधिक घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई हो सकेगी और पीड़ितों को न्याय दिलाना आसान होगा। इसके अलावा, आरोपी की संपत्ति जब्त करके पीड़ित को देना एक नया प्रावधान है, जो यौन अपराध के खिलाफ कठोर संदेश भी देगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि नाबालिग बलात्कार पीड़ितों के संवेदनशील मामलों में समय सीमा तय करने का अधिकार केवल कानून को ही प्राप्त है और डॉक्टर या राज्य सरकारों द्वारा इसे निर्धारित करना उचित नहीं है। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित पक्ष मिलकर पीड़ितों के हित में नीतियां एवं प्रावधान सुनिश्चित करें। इस फैसले से नाबालिग पीड़ितों को न्याय प्रक्रिया में सहूलियत मिलेगी और उन्हें जल्द राहत मिलेगी।

