न्यू मैक्सिको में चल रहे एक अहम मुकदमे के दूसरे चरण में अभियोजक मेटा के एप और एल्गोरिदम पर बाल सुरक्षा संबंधी कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं। ये बदलाव मुख्य रूप से बच्चों को ऑनलाइन नुकसान से बचाने और उनके व्यक्तिगत डेटा की रक्षा के लिए प्रस्तावित किए गए हैं।
अभियोजकों ने एक न्यायाधीश से उन फीचर्स को नियंत्रित करने का आग्रह किया है जो बच्चों में ऑनलाइन एडीक्शन यानी लत को बढ़ावा देते हैं। इसके अलावा, वे उम्र की पुष्टि की प्रक्रिया को बेहतर बनाना चाहते हैं ताकि नाबालिग बच्चों की जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
मुकदमे के दूसरे चरण में, अभियोजक यह भी मांग कर रहे हैं कि डिफ़ॉल्ट प्राइवेसी सेटिंग्स को कड़ा बनाया जाए और प्लैटफॉर्म पर नजदीकी निगरानी रखी जाए ताकि बच्चों के यौन शोषण की घटनाओं को रोका जा सके। वे सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल एप्लिकेशन्स पर उन एल्गोरिदम की समीक्षा करना चाहते हैं जो बच्चों को जोखिम में डालते हैं।
न्यू मैक्सिको के गृह विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा, “हमारा लक्ष्य बच्चों को ऑनलाइन खतरे से बचाना और सुनिश्चित करना है कि कंपनियां अपनी जिम्मेदारी समझें और उनकी सुरक्षा प्राथमिकता बनाएं।”
मेता के प्रतिनिधियों ने फिलहाल इस मामले पर कोई अधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। हालांकि, कंपनी पहले भी यह कह चुकी है कि वे अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार सुधार कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अदालत द्वारा ये प्रस्तावित बदलाव लागू हो गए, तो यह डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम होगा। इससे न केवल बच्चों को नुकसान से बचाया जा सकेगा बल्कि अन्य कंपनियों को भी अपने प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा को महत्व देने के लिए प्रेरणा मिलेगी।
यह मामला डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा पर बढ़ते चिंताओं को दर्शाता है और इस विषय में कानूनी प्रक्रिया को और मजबूत करने की जरूरत पर भी प्रकाश डालता है। इसके साथ ही यह साबित करता है कि सरकारी संस्थाएं और अदालतें बच्चों की सुरक्षा के लिए कठोर कदम उठाने को तैयार हैं।
अभी यह देखना बाकी है कि अदालत इन मांगों पर क्या फैसला करती है और क्या मेटा सहित अन्य तकनीकी कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म की सुरक्षा में आवश्यक बदलाव करती हैं।

