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Surat-based Anupam Rasayan India to acquire upto 74.2 per cent in Bliss GVS Pharma

सूरत आधारित अनुपम रसायन इंडिया एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ब्लिस जीवीएस फार्मा में 43.3 से 48.2 प्रतिशत भागीदारी के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। इस लेन-देन की कुल कीमत 1,360 करोड़ रुपये से अधिक है, जिसमें कंपनी मौजूदा शेयरधारकों के लिए एक खुला ऑफर भी दे रही है।

इस डील के तहत अनुपम रसायन इंडिया ब्लिस जीवीएस फार्मा में अपनी हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 74.2 प्रतिशत तक अधिग्रहण कर सकती है, जिससे फार्मा क्षेत्र में उनकी पकड़ और मजबूत होगी। इस अधिग्रहण से दोनों कंपनियों को फायदे की उम्मीद है, खासकर नए उत्पाद विकास एवं बाजार विस्तार के मामले में।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह सौदा दोनों कंपनियों के व्यवसायिक दायरे को व्यापक बनाने के साथ ही प्रतिस्पर्धात्मक बाजार में उनकी स्थिति को अधिक स्थिर करेगा। वर्तमान में, ब्लिस जीवीएस फार्मा फार्मास्यूटिकल्स, बायोटेक्नोलॉजी और वैक्सीन निर्माण के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती है।

कंपनी का यह प्रस्तावित अधिग्रहण भारतीय फार्मा बाजार के तेजी से विकास और निवेश अवसरों को दर्शाता है, जहां डिजिटल और बायोटेक्नोलॉजी आधारित नवाचारों के लिए बड़ा संभावित क्षेत्र है। अनुपम रसायन के इस कदम को निवेशकों द्वारा सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है, जो आने वाले समय में कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद जताती है।

इस अवसर पर, अनुपम रसायन इंडिया के प्रमुख अधिकारियों ने कहा कि उनका लक्ष्य न केवल व्यापार का विस्तार करना है बल्कि उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधाओं को भी बढ़ावा देना है। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि वे सभी नियामक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ इस प्रक्रिया को पूरा करेंगे।

मार्केट विश्लेषक मानते हैं कि इस अधिग्रहण के बाद, लंबी अवधि में दोनों कंपनियों को टेक्नोलॉजी, अनुसंधान एवं विकास तथा उत्पादन क्षमताओं में वृद्धि देखने को मिलेगी। साथ ही, यह लेन-देन भारत में फार्मा सेक्टर में विदेशी निवेश को भी आकर्षित कर सकता है।

सहित्य एवं बाजार विशेषज्ञों की राय में, अनुपम रसायन इंडिया द्वारा ब्लिस जीवीएस फार्मा का अधिग्रहण, देश के फार्मास्यूटिकल उद्योग के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जो न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा। यह कदम अंतत: उपभोक्ताओं के लिए बेहतर चिकित्सा साधनों की उपलब्धता और किफायती दवाओं की पहुंच सुनिश्चित करेगा।

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