नई दिल्ली: त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि नाखूनों में लगातार सफेद धारियों, पट्टियों या रंग परिवर्तन के लक्षण कभी-कभी पोषण की कमी, चयापचय विकारों और दीर्घकालिक प्रणालीगत बीमारियों के प्रारंभिक संकेत हो सकते हैं। यह जानकारी उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग हैं और सामान्य से अलग नाखूनों की बनावट या रंग में बदलाव को नजरअंदाज करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, नाखून हमारे शरीर की संपूर्ण स्थिति का आईना होते हैं। धीरे-धीरे नाखूनों पर आए बदलाव न केवल बाहरी कारणों से होते हैं बल्कि अंदरूनी स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत भी दे सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, नाखूनों पर सफेद धारियां या धब्बे अक्सर जिंक, कैल्शियम, विटामिन B12 जैसे पोषक तत्वों की कमी को दर्शा सकते हैं।
डॉक्टर रहींका शर्मा, एक अनुभवी त्वचा विशेषज्ञ, कहती हैं, “यदि आपकी नाखूनों पर सफेद रेखाएं या पट्टियां बन रही हैं जो सामान्य से अधिक समय तक बनी रहती हैं, तो यह विटामिन की कमी या लिवर संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है। इसके अलावा, मधुमेह, थायरॉयड विकार, और अन्य मेटाबोलिक डिसऑर्डर भी नाखूनों के रंग और बनावट को प्रभावित कर सकते हैं।”
चिकित्सा क्षेत्र में हुए शोधों से पता चला है कि कुछ लगातार बनी रहने वाली नाखून दोष जैसे कि स्नो व्हाइट पट्टियां, नाखूनों का पपड़ीदार होना, या रंग बदल जाना, रक्त शर्करा की असामान्यताएं, गुर्दे और लीवर की समस्याओं या हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियाँ भी इंगित कर सकता है। इसलिए, सतर्क रहकर नाखूनों में दिखने वाले इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
वैसे तो नाखूनों में मामूली रंग बदलना अपेक्षाकृत सामान्य है और कई बार यह बाहरी कारणों जैसे चोट लगना, रासायनिक द्रव्यों का प्रयोग या अत्यधिक नाखून पॉलिश उपयोग से भी होता है। परंतु जब ये बदलाव लगातार और स्पष्ट हों, तो यह निश्चित रूप से डॉक्टर से सलाह लेने का संकेत है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि स्वस्थ नाखूनों के लिए संतुलित आहार, जो विटामिन, प्रोटीन और आवश्यक खनिजों से भरपूर हो, लेना अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच भी नाखूनों के माध्यम से छुपी हुई बीमारियों की पहचान में मदद कर सकती है।
अंततः, नाखूनों में हुए लगातार सफेद रंग के बदलाव या स्ट्रिप्स को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि ये न केवल पोषण संबंधी कमी, बल्कि अन्य गम्भीर स्वास्थ्य समस्याओं के भी संकेत होते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की माने तो प्रारंभिक चेतावनी संकेतों पर ध्यान देकर समय रहते उपचार संभव है और इससे कई दीर्घकालिक बीमारियों को रोका जा सकता है।

