Headline
Story of Valmiki
वाल्मीकि की कहानी
'Blatant act of aggression': India strongly condemns Pakistan air strikes on Afghan territory
‘खुला हमला’: भारत ने अफगान क्षेत्र में पाकिस्तान के हवाई हमलों की कड़ी निंदा की
Former ISRO scientist Mayilsamy Annadurai to lead panel to overhaul TN school curriculum
पूर्व इसरो वैज्ञानिक मेयिलसामी अन्नादुरई तमिलनाडु स्कूल पाठ्यक्रम सुधार करने वाली कमेटी के प्रमुख बने
My father stayed underground for 19 months during Emergency, recalls P.V.N. Madhav
आपातकाल के दौरान मेरे पिता 19 महीने भूमिगत रहे, याद करते हैं पी.वी.एन. माधव
Lydian Nadhaswaram unveils his Symphony No. 1 – New Beginnings
लिडियन नाधस्वरम ने अपनी सिम्फनी नंबर 1 – नई शुरुआत का अनावरण किया
Sooryavanshi must 'bide his time and wait,' says ten Doeschate
सूर्यवंशी को ‘अपना समय आने तक इंतजार करना होगा,’ कहते हैं टेन डोएशेट
Interview | Steve Brusatte on why India could be the world’s next dinosaur hotspot
साक्षात्कार | स्टीव ब्रुसेट ने बताया क्यों भारत हो सकता है दुनिया का अगला डायनासोर हॉटस्पॉट
2-Day Spiritual Journey Through Central & East Palakkad Temples
2-दिवसीय आध्यात्मिक यात्रा: मध्य और पूर्व पलक्कड़ के मंदिर
Landscapes of Belonging at Lalit Kala Akademi explores the meaning of home through art
ललित कला अकादमी में ‘लगाव के परिदृश्य’ प्रदर्शनी: कला के माध्यम से घर का अर्थ तलाश
Out-of-pocket expenditure on health shows declining trend, states latest National Health Accounts

नई दिल्ली: स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि वर्ष 2022-23 में स्वास्थ्य व्यय के कुल खर्च में से आम जेबखर्च की हिस्सेदारी 43.4 प्रतिशत रही, जो कि 2013-14 में 64.2 प्रतिशत थी। यह उल्लेखनीय गिरावट देश में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के सुधार को दर्शाती है।

अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस कमी में मुख्य भूमिका लगभग 1.8 लाख आयुष्मान आरोग्य मन्दिर वेलनेस सेंटरों के संचालन की रही है, जो पूरे देश में स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के कारण आम जनता को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ स्तर पर प्राप्त हो रही हैं, जिससे निजी खर्च में कमी आई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में स्वास्थ्य सेवा पहुंच बढ़ाने और आर्थिक बोझ कम करने के लिए यह पहल महत्वपूर्ण है। आयुष्मान भारत योजना के तहत संचालित ये वेलनेस सेंटर न केवल आम जनता को प्रारंभिक स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करते हैं, बल्कि रोगों के प्रबंधन और रोकथाम पर भी ध्यान केंद्रित करते हैं।

स्वास्थ्य मन्त्रालय के अनुसार, इस दौरान स्वास्थ्य प्रणाली में सार्वजनिक निवेश में वृद्धि और विभिन्न सुरक्षा योजनाओं के प्रभाव से भी जेबखर्च में कमी आई है। इससे गरीब और मध्यवर्गीय परिवारों को आर्थिक राहत मिली है, जो पहले स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अपने परिवार की आमदनी का बड़ा हिस्सा खर्च करते थे।

विश्लेषकों ने बताया कि भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र अब अधिक समावेशी और आर्थिक रूप से टिकाऊ होता जा रहा है। इससे देश की कुल स्वास्थ्य प्रणाली में विश्वास बढ़ा है और इलाज कराने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों का प्राथमिक चयन बढ़ा है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस दिशा में जारी प्रयासों से आने वाले वर्षों में और भी बेहतर परिणाम सामने आएंगे।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने आगे कहा कि वे लगातार आंकड़ों का विश्लेषण कर सेवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए नीतियां बनाते रहेंगे। वेलनेस सेंटरों की संख्या और उनके द्वारा दी जाने वाली सेवाओं का विस्तार भी इसी कड़ी में आगे बढ़ाया जाएगा।

इस तरह के कदम भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने और हर नागरिक को सस्ती एवं आसान स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञ इस प्रवृत्ति को स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानते हैं और उम्मीद करते हैं कि भविष्य में भी यह गिरावट जारी रहेगी।

Source