नई दिल्ली। देशभर में गर्मी की लहर से उत्पन्न चुनौतियों को देखते हुए प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रालयों और सरकारी विभागों को इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया है। उन्होंने एक ‘सम्पूर्ण राष्ट्र’ (Whole-of-Nation) दृष्टिकोण अपनाने पर ज़ोर देते हुए कहा कि न केवल प्रशासनिक तंत्र बल्कि आम जनता, स्थानीय निकायों और अन्य संस्थानों को भी मिलकर इस समस्या का मुकाबला करना होगा।
प्रधानमंत्री ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे गर्मी से होने वाले प्रभावों से सावधान रहें और गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं जैसे हीट एक्सॉस्टेशन (Heat Exhaustion) के संकेतों को गंभीरता से लें। उन्होंने कहा, “गर्मी के इन दिनों में शरीर में पानी की कमी और अत्यधिक गर्माहट से स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।”
गर्मी की लहर के दौरान मिलने वाली लक्षणों में कमजोरी, चक्कर आना, अत्यधिक पसीना आना, त्वचा का सूखना, और उल्टी शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने नागरिकों को सलाह दी कि यदि ऐसी कोई स्थिति महसूस हो तो तुरंत ठंडी जगह पर जाएं, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और आवश्यक हो तो चिकित्सकीय सहायता लें।
सरकारी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे विशेष तौर पर बाहर काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा के लिए मापदंड बनाएं, सार्वजनिक स्थानों पर जलपानी की पर्याप्त व्यवस्था करें, और अस्पतालों में गर्मी से संबंधित बीमारियों के लिए विशेष तैयारी करें। इसके अलावा, गर्मी लहर के दौरान विद्युत आपूर्ति में व्यवधान न हो, इसके लिए बिजली विभागों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है।
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव ने देश में गर्मी की तीव्रता और अवधि दोनों में वृद्धि की है। इस दिशा में प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण, हरियाली बढ़ाने, और ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एक सामूहिक प्रयास से हम गर्मी की इन चुनौतियों का सामना बेहतर तरीके से कर सकते हैं।
सरकार की ओर से जारी मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, आगामी दिनों में कई राज्यों में तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जिससे कि गर्मी से जुड़ी आपातस्थिति बनी रह सकती है। इसलिए जनता और प्रशासन दोनों को सतर्क रहना आवश्यक है।
इस अभियान में स्वास्थ्य मंत्रालय, गृह मंत्रालय, जल संसाधन मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय सहित सभी संबंधित विभाग सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। साथ ही विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों एवं स्थानीय प्रशासन को भी इस संकट से निपटने में सरकार का सहयोग देने का आह्वान किया गया है।
प्रधानमंत्री के इस निर्देश से यह स्पष्ट होता है कि सरकार गर्मी की लहर की मार कम करने के लिए गंभीर है और हर स्तर पर समन्वय व जागरूकता को बढ़ावा देना चाहती है। वे नागरिकों से भी सहयोग करने और सावधानी बरतने का आग्रह कर रहे हैं ताकि हम सभी इस समस्या को मिलकर सुलझा सकें।

