नई दिल्ली: चालीस दिन, लगभग 13,000 किलोमीटर और 24 ट्रेनों की सवारी — यह गणना फिलहाल श्रीलंकाई अधिकारी समन अथौडहेट्टी के फरवरी और मार्च महीने की है। उन्होंने अपने लंबे समय से चले आ रहे सपने को पूरा करने के लिए भारत की रेलवे नेटवर्क के माध्यम से इस पड़ोसी देश की खोज की।
समन ने यात्रा शुरू करते हुए बताया कि भारत की विविधता और चमत्कारों को देखने का यह मौका उनके लिए बेहद खास था। उन्होंने कहा, “भारत की रेलवे यात्राओं में न केवल प्राकृतिक सुंदरता बल्कि सांस्कृतिक विविधता का भी अनुभव हुआ, जिसने मेरे दृष्टिकोण को व्यापक किया।”
पूर्व में समन की दिलचस्पी भारतीय कल्चर और इतिहास में रही है। उनकी यह यात्रा न केवल पर्यटन के लिहाज से बल्कि व्यक्तिगत रूप से भी transformative साबित हुई। भारत की विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं, और हिंदू-मुस्लिम सथे सामाजिक एकता को रेल द्वारा करीब से देखने का मौका मिला।
समन ने बताया कि यात्रा के दौरान उन्होंने दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बंगलौर जैसे शहरों की प्रमुख जगहों का अवलोकन किया और उनमें बसे विभिन्न समुदायों से संवाद किया। इसके अलावा, ग्रामीण इलाकों की सादगी और वहां के लोग भी उनके लिए आकर्षण का केंद्र रहे।
भारतीय रेलवे की जटिल पर प्रणाली से परिचित होने के साथ ही उन्होंने भारतीय यात्रियों की भिन्न-भिन्न आदतें, खाने-पीने और सांस्कृतिक पाक्षिकताओं का भी आनंद उठाया। “मुझे लगा कि रेलवे की यात्रा के द्वारा ही वास्तव में भारत को समझा जा सकता है,” समन ने कहा।
इस यात्रा से समन का मानना है कि सांस्कृतिक अंतर को पाटने में यातायात नेटवर्क की भूमिका अमूल्य होती है। उन्होंने भारतीय रेलवे के साधनों और व्यवस्थाओं की प्रशंसा करते हुए बताया कि यह नेटवर्क न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए एक कनेक्टिंग ब्रिज जैसा है।
आगे समन ने बताया कि इस अनुभव ने उन्हें अपनी दृष्टि को और अधिक खुले और सहिष्णु बनाने में मदद की है और आने वाले समय में वह इस प्रकार की यात्राओं को बढ़ावा देना चाहते हैं ताकि बाहर के लोग भारत को और बेहतर तरीके से समझ सकें।
रेल यात्रा के माध्यम से भारत की तह तक जाने की चाह समन के यात्रा डायरी का सबसे बड़ा भाग रही। उन्होंने रास्ते में मिलें लोगों, सांस्कृतिक उत्सवों और रेलवे स्टेशनों के अनुभवों को भी साझा किया। यह यात्रा न केवल उनके लिए बल्कि उन सभी के लिए प्रेरणा है जो भारत की विविधता को जानना चाहते हैं।
इस तरह समन अथौडहेट्टी की रेल यात्रा भारतीय सांस्कृतिक परिदृश्य को समझने और साझा करने का एक अनूठा प्रयास साबित हुआ।

