नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) 2030 की तैयारियों को गति देने के लिए खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSFs) के साथ आईटी कंसल्टेंट्स को शामिल करने का निर्णय लिया है। यह कदम डिजिटल सिस्टम्स की सुचारू तरीके से ऑनबोर्डिंग, संचालन और समन्वय सुनिश्चित करने हेतु उठाया गया है।
सूत्रों की मानें तो आईटी कंसल्टेंट्स को विशेष रूप से NSDE (National Sports Digital Ecosystem) फ्रेमवर्क के तहत काम करना होगा, जो खेल महासंघों के डिजिटलीकरण एवं तकनीकी अवसंरचना को सुदृढ़ करने का एक पहल है। इन कंसल्टेंट्स की मुख्य जिम्मेदारी होगी डिजिटल सिस्टमों का प्रभावी कार्यान्वयन और खेल से जुड़ी प्रक्रियाओं का सरल एवं पारदर्शी रूप देना।
खेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यह पहल खेल महासंघों के प्रबंधन को तकनीकी दृष्टि से मजबूत बनाएगी, जिससे वे अपने कार्यों को अधिक प्रभावशाली तरीके से अंजाम दे सकेंगे। डिजिटल प्लेटफॉर्म का बेहतर उपयोग खेलों के विकास में सहायक होगा।”
कंसल्टेंट्स की सहायता से NSFs को ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया और संचालन के दूसरे चरणों में आने वाली तकनीकी दिक्कतों का समाधान मिलेगा। साथ ही, विभिन्न डिजिटल प्रणालियों के बीच समन्वय स्थापित करने में भी सहायता मिलेगी, जिससे कम्युनिकेशन और कार्य शिक्षा बेहतर होगी।
देश में खेलों को बढ़ावा देने, प्रबंधन को ज्यादा पारदर्शी बनाने और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल रूपांतरण अनिवार्य होता जा रहा है। CWG 2030 की तैयारियों को देखते हुए खेल मंत्रालय यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सभी खेल महासंघ आधुनिक तकनीकी मानकों के अनुसार कार्य करें।
यह डिजिटल ढांचा खेल प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है जिसमें इवेंट मैनेजमेंट, खिलाड़ी डेटा, कोचिंग संसाधन, और वित्तीय प्रबंधन शामिल हैं। आईटी कंसल्टेंट्स की भूमिका इन सब विषयों के बीच संबंध बनाए रखने और इसे आसान बनाने में अहम होगी।
इससे पहले भी मंत्रालय ने विभिन्न डिजिटल परियोजनाएं शुरू की हैं, परंतु NSDE फ्रेमवर्क के माध्यम से आईटी कंसल्टेंट्स की सहभागिता से इन प्रयासों को और बल मिलेगा। CWG 2030 के लिए यह विशेष पहल भारतीय खेलों के भविष्य को एक नई दिशा देने की संभावना रखती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खेल मंत्रालय का यह कदम डिजिटल युग में खेल प्रबंधन को और भी प्रभावी एवं पारदर्शी बनाएगा, जिससे खिलाड़ियों की प्रतिभा को सही मंच मिलेगा, देश में खेलों की गुणवत्ता में सुधार होगा और विश्व स्तर पर भारत की खेल छवि मजबूत होगी।

