नई दिल्ली: सीयूईटी-यूजी 2026 परीक्षा में तकनीकी खराबी के कारण कुछ अभ्यर्थियों को पुनः परीक्षा देने का मौका मिलेगा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने इस बात की पुष्टि की है कि 30 मई को हुई इस परीक्षा के दौरान तकनीकी समस्या सामने आई थी, जिसे समाधान कर लिया गया है। इस समस्या के कारण कुल 3,765 परीक्षार्थियों के लिए पुनः परीक्षा आयोजित की जाएगी।
टेक्निकल सपोर्ट प्रोवाइडर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने बताया कि 30 मई को आई तकनीकी समस्या को जल्द ही ठीक कर दिया गया था और परीक्षा बिना किसी गड़बड़ी के फिर से शुरू कर दी गई। एजेंसी का साफ कहना है कि इस तकनीकी खराबी का परीक्षा की पवित्रता या विश्वसनीयता पर कोई असर नहीं पड़ा है।
एनटीए के प्रवक्ता ने बताया कि “30 मई को हुई समस्या को देख तुरंत कार्रवाई की गई और समस्या को हल कर सभी उम्मीदवारों को उचित समय पर टेस्ट पूरा करने का अवसर दिया गया। हम परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
सूत्रों के अनुसार, जिन अभ्यर्थियों का प्रयास तकनीकी खराबी के दौरान बाधित हुआ था, उन्हें पुनः परीक्षा देने का अवसर एनटीए द्वारा विशेष नोटिस के माध्यम से सूचित किया जाएगा। यह पुनः परीक्षा जल्दतम संभव समय में आयोजित की जाएगी ताकि किसी भी अभ्यर्थी के हक का नुकसान न हो।
परीक्षा में तकनीकी समस्याओं के कारण छात्रों के मनोबल पर असर पड़ना एक गंभीर मुद्दा है, इसलिए एनटीए ने इस समस्या को प्राथमिकता से लेते हुए सभी जरूरी कदम उठाए हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसी किसी भी तकनीकी बाधा से बचने के लिए और अधिक कड़े निरीक्षण एवं सुरक्षा इंतजाम लागू किए जाएंगे।
यह जानकारी तब आई है जब सीयूईटी-यूजी परीक्षा देश भर में उच्च शिक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षा के रूप में उभर रही है। लाखों अभ्यर्थी इस परीक्षा में बैठते हैं, जिससे परीक्षा का निष्पक्ष और सुचारू संचालन अनिवार्य हो जाता है।
इस संदर्भ में, विशेषज्ञों ने भी एनटीए की तत्परता और समस्या के समाधान के तरीके की सराहना की है। कई शिक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि परीक्षा के संचालन में कोई भी तकनीकी खामी जल्दी से जल्दी सुधारे जाने की उम्मीद बनाए रखना आवश्यक है, जो एनटीए ने इस घटना के दौरान किया है।
अतः, इस तकनीकी हादसे को देखते हुए एनटीए का पुनः परीक्षा कराने का निर्णय अभ्यर्थियों के हित में एक स्वागत योग्य कदम माना जा रहा है। इससे न केवल परीक्षार्थियों का आत्मविश्वास बना रहेगा, बल्कि परीक्षा के मानदंड भी सुरक्षित रहेंगे।

