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‘खुला हमला’: भारत ने अफगान क्षेत्र में पाकिस्तान के हवाई हमलों की कड़ी निंदा की
Former ISRO scientist Mayilsamy Annadurai to lead panel to overhaul TN school curriculum
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My father stayed underground for 19 months during Emergency, recalls P.V.N. Madhav
आपातकाल के दौरान मेरे पिता 19 महीने भूमिगत रहे, याद करते हैं पी.वी.एन. माधव
Lydian Nadhaswaram unveils his Symphony No. 1 – New Beginnings
लिडियन नाधस्वरम ने अपनी सिम्फनी नंबर 1 – नई शुरुआत का अनावरण किया
Sooryavanshi must 'bide his time and wait,' says ten Doeschate
सूर्यवंशी को ‘अपना समय आने तक इंतजार करना होगा,’ कहते हैं टेन डोएशेट
Interview | Steve Brusatte on why India could be the world’s next dinosaur hotspot
साक्षात्कार | स्टीव ब्रुसेट ने बताया क्यों भारत हो सकता है दुनिया का अगला डायनासोर हॉटस्पॉट
2-Day Spiritual Journey Through Central & East Palakkad Temples
2-दिवसीय आध्यात्मिक यात्रा: मध्य और पूर्व पलक्कड़ के मंदिर
Landscapes of Belonging at Lalit Kala Akademi explores the meaning of home through art
ललित कला अकादमी में ‘लगाव के परिदृश्य’ प्रदर्शनी: कला के माध्यम से घर का अर्थ तलाश
Switzerland’s MSC to acquire 49% stake in Adani’s Vizhinjam port in Kerala for ₹13,220 crore
स्विट्ज़रलैंड की MSC द्वारा अदानी के विज़िन्ज़म बंदरगाह में 13,220 करोड़ रुपये में 49% हिस्सेदारी अधिग्रहित
India, U.K. launch Critical Minerals Global Supply Chain Observatory for improved cooperation, tech-sharing

नई दिल्ली। अक्टूबर पिछले वर्ष घोषित की गई क्रिटिकल माइनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जरवेटरी अब भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच सहयोग को नए आयामों पर ले जाने के लिए सशक्त कदम बनकर उभरी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य खनिजों के क्षेत्र में व्यापक कवरेज प्रदान करना, उन्नत तकनीकों का समावेश करना और दोनों देशों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करना है।

दोनों देशों के बीच यह सहयोग एक वैश्विक स्तर पर रणनीतिक महत्व रखता है क्योंकि आज के युग में मिनरल्स की मांग निरंतर बढ़ रही है, खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों, उर्जा भंडारण और उच्च तकनीकी उपकरों के क्षेत्र में। इस ऑब्जरवेटरी के माध्यम से संसाधनों की उपलब्धता और उनकी आपूर्ति श्रृंखला की पारदर्शिता में सुधार होगा, जिससे उद्योगों को स्थाई और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

इस पहल में उन्नत डिजिटल उपकरणों और डेटा विश्लेषण तकनीकों का प्रयोग कर खनिजों के उत्पादन, वितरण और उपयोग के सभी महत्वपूर्ण चरणों की निगरानी होगी। साथ ही यह दोनों देशों के खनिज विशेषज्ञों, उद्योगपतियों और नीति निर्माताओं को एक मंच प्रदान करेगा जहां वे साझा रणनीतियों पर चर्चा कर सकेंगे और तकनीकी नवाचारों को साझा कर सकेंगे।

भारत के ऊर्जा मंत्री और यूके के संबंधित विभाग के अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट की महत्ता पर जोर देते हुए इसे द्विपक्षीय संबंधों में रणनीतिक सहयोग के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में मान्यता दी है। उन्होंने कहा कि ऑब्जरवेटरी भारत और यूके की आर्थिक विकास योजनाओं को मजबूती प्रदान करेगी और वैश्विक खनिज आपूर्ति चेन की स्थिरता में योगदान देगी।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस पहल से दोनों देशों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, तकनीकी अन्वेषण को बढ़ावा मिलेगा और टिकाऊ विकास मॉडल को सशक्त किया जाएगा। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जवाबदेही के मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए भी यहां विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इस ऑब्जरवेटरी के क्रियान्वयन से भारत और यूके के बीच न केवल व्यापारिक संबंधों में मजबूती आएगी, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भी एक मिसाल कायम करेगा कि कैसे सहयोग और तकनीकी आदान-प्रदान से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और उपयोग को बेहतर बनाया जा सकता है। आने वाले वर्षों में इस मंच से और अधिक प्रसार और विस्तार की उम्मीद है, जो दोनों देशों के लिए नवाचार और सतत विकास की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

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