वॉशिंगटन, 27 अप्रैल: अमेरिका में एक महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना सामने आई है, जहां एक अमेरिकी सांसद ने H-1B वीजा प्रणाली में व्यापक सुधार का प्रस्ताव रखा है। इस नए कानून संशोधन, जिसका नाम ‘अमेरिकन वाइट-कलर वर्कर जॉब्स एक्ट’ रखा गया है, के तहत H-1B वीजा धारकों को अपनी विदेश में आवास बनाए रखने की शर्त रखी जाएगी और देश की लंबी अवधि से चली आ रही “डुअल इंटेंट” नीति को उलट दिया जाएगा। इस कदम का मकसद अमेरिकी वीजा प्रणाली को अधिक कड़े नियमों के तहत पुनर्गठित करना है।
वर्तमान में H-1B वीजा धारक अमेरिका में रहते हुए ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिससे उनकी वीजा स्थिति को स्थायित्व मिलता है। हालांकि, नए प्रस्तावित कानून के अनुसार, ऐसे वीजा धारकों को वीजा के विस्तार या नवीनीकरण के लिए अनुमति नहीं दी जाएगी जब उनकी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया लंबित हो। यह बदलाव अमेरिका में नौकरी पाने वाले विदेशी विशेषज्ञों की स्थायी आव्रजन प्रक्रिया को काफी प्रभावित कर सकता है।
इस प्रस्तावित संशोधन का एक प्रमुख हिस्सा विदेश में निवास बनाए रखने का नियम है, जो H-1B वीजाधारकों की वर्तमान जीवनशैली में एक बड़ा बदलाव लाएगा। यह नियम उन पेशेवरों पर सीधे प्रभाव डालेगा जो अमेरिका में काम करते हुए अपने परिवार के साथ संयुक्त रूप से रहने के लिए ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुधार का उद्देश्य अमेरिकी श्रम बाजार में घरेलू कर्मचारियों को बढ़ावा देना और विदेशी कार्यबल की प्रतिस्पर्धा को सीमित करना है। हालांकि, आलोचकों ने यह भी कहा है कि यह कदम उच्च शिक्षा प्राप्त विदेशी पेशेवरों और तकनीकी क्षेत्र में अमेरिका की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को कम कर सकता है।
सांसद द्वारा प्रस्तुत यह बिल अगर पारित होता है, तो यह H-1B वीजा प्रणाली में सबसे बड़े बदलावों में से एक माना जाएगा। इसकी वजह यह है कि इससे न केवल वीजा धारकों का जीवन प्रभावित होगा बल्कि तकनीकी कंपनियों, शैक्षिक संस्थानों और अन्य क्षेत्रीय उद्योगों को भी इसके प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिका में H-1B वीजा प्रणाली के संदर्भ में यह प्रस्ताव सरकार की कार्यनीति में एक नया अध्याय खोल सकता है। इसकी समीक्षा और बहस आगामी महीनों में अमेरिकी कांग्रेस में प्रमुख मुद्दा बनेगी, जिससे आव्रजन नीति पर नए मतभेद और भी उभर सकते हैं।
अंततः यह प्रस्तावित संशोधन अमेरिकी वीजा नीति की दिशा और स्वरूप को गहराई से प्रभावित कर सकता है, जो विदेशी पेशेवरों के लिए एक चुनौतीपूर्ण स्थिति उत्पन्न कर सकता है। इसलिए इस पर व्यापक विचार-विमर्श और संतुलित निर्णय की आवश्यकता होगी।

