नई दिल्ली। भारत में सौर ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों ने कर्नाटक उच्च न्यायालय का रुख किया है। उन्होंने नई और नवीनीकृत ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा जारी आदेशों को चुनौती दी है, जिनमें घरेलू सौर-सेल निर्माताओं की एक स्वीकृत सूची, ALMM List-II, के अंतर्गत परियोजनाओं के लिए घरेलू सेल के इस्तेमाल को बाध्यकारी किया गया है। यह नियम 1 जून, 2026 या इसके बाद शुरू की जाने वाली परियोजनाओं पर लागू होगा।
इस याचिका का मुख्य उद्देश्य मंत्रालय की उस नीति को चुनौती देना है जो परियोजनाओं के लिए केवल ALMM List-II में उल्लिखित घरेलू निर्माताओं की सामग्री का उपयोग करने के हक में निर्णय लेती है। सौर कंपनियों का तर्क है कि यह आदेश बाजार में प्रतिस्पर्धा को सीमित कर सकता है और न केवल परियोजनाओं की लागत बढ़ाएगा बल्कि नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए भी बाधक साबित हो सकता है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह मण्डेटर नियम घरेलू उद्योग को अनावश्यक लाभ पहुंचाते हुए अन्य विदेशी निर्माताओं को अपरिहार्य रूप से बाहर करने के समान है, जिससे सौर ऊर्जा क्षेत्र में निरंतर विकास की राह में बाधा उत्पन्न होगी। इसके साथ ही, इस नीति के कारण बाजार में आपूर्ति श्रृंखला में असंतुलन और दीर्घकालिक परियोजनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
MNRE ने अपनी तरफ से कहा है कि इस नीति का उद्देश्य घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और भारत को स्वदेशी उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। साथ ही, यह नियम पारदर्शिता, गुणवत्ता नियंत्रण, तथा देश में सौर सेल निर्माण क्षमता विकास को सुनिश्चित करता है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस नीति के तहत सूचीबद्ध उत्पादों की समीक्षा नियमित आधार पर की जाती रहेगी ताकि वह प्रासंगिक और उपयुक्त बनी रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद से यह स्पष्ट होता है कि भारत के मेक इन इंडिया प्रयास और घरेलू उद्योग को बढ़ावा देने के प्रयासों में संतुलन बैठाना कितना महत्वपूर्ण है। उद्योग हितधारक और नीति निर्माता दोनों को आपस में संवाद करना होगा ताकि नीतियों का ऐसा विकास हो जो विकास के साथ-साथ प्रतिस्पर्धा को भी सुनिश्चित करे।
वर्तमान में, सौर ऊर्जा भारत के ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा क्षेत्र है और यह विवाद सरकार के नवीनीकृत ऊर्जा के लक्ष्य और औद्योगिक नीति के दृष्टिकोण दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को भी दर्शाता है। न्यायालय में यह मामला आगे कैसे बढ़ता है, इस पर उद्योग की नज़रें टिकी हैं।
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, न्यायालय का यह निर्णय न केवल सौर ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि पूरे देश की नवीनीकृत ऊर्जा नीति के भविष्य को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए, संबंधित पक्षों द्वारा सावधानीपूर्वक रणनीति अपनाना आवश्यक है।

