नई दिल्ली: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मई माह के लिए थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर जारी की है, जिसमें आधार वर्ष को पुराने 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया है। इस नवीनतम आंकड़े के अनुसार, मई महीने में WPI महंगाई दर 9.68 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जो ईंधन, खाद्य सामग्री तथा निर्मित वस्तुओं के मूल्य में वृद्धि के कारण हुई है।
थोक मूल्य सूचकांक वह मापक है जो वस्तुओं के थोक स्तर पर मूल्य परिवर्तनों को दर्शाता है। इस सूचकांक में आए बदलाव से खासकर उपभोक्ताओं एवं उद्योगों को महंगाई की नई तस्वीर सामने आई है। मंत्रालय ने आधार वर्ष को अपडेट कर महंगाई के वास्तविक प्रभाव को अधिक पारदर्शी और प्रासंगिक बनाने का प्रयास किया है।
मई माह में ईंधन की कीमतों में खासतौर पर वृद्धि देखी गई, जिससे परिवहन तथा उत्पादन लागत बढ़ गई। खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने से आम आदमी की जेब पर सीधे असर पड़ा है। इसके साथ ही निर्मित वस्तुओं की कीमतों में भी उछाल आया है, जो कच्चे माल की महंगाई एवं वैश्विक मांग में वृद्धि के चलते हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि WPI महंगाई दर में यह बढ़ोतरी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) से भिन्न है, लेकिन दोनों सूचकांक मिलकर देश की आर्थिक स्थिति पर महंगाई दबाव को समझने में मदद करते हैं। थोक स्तर पर महंगाई बढ़ने से अगले कुछ महीनों में खुदरा कीमतों में भी बढ़ोतरी के संकेत मिलते हैं।
मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट में साफ किया गया है कि पिछले वर्षों की तुलना में आधार वर्ष के बदलाव के कारण आंकड़ों में तुलना हेतु थोड़ा निरंतरता चुनौतीपूर्ण हो सकती है, लेकिन यह कदम आर्थिक नीतियों की योजना और सही मूल्यांकन के लिए आवश्यक था।
सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि महंगाई पर नियंत्रण रखने के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे, और मूल्य स्थिरता के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। वहीं, उपभोक्ताओं एवं व्यापार जगत को भी बदलते आर्थिक परिदृश्य के अनुसार समायोजन करना होगा।
इस महंगाई के दबाव के बीच, विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि घरेलू बजट की योजना तैयार करते समय इन नई कीमतों को ध्यान में रखा जाए ताकि आर्थिक चुनौतियों का सामना आसानी से किया जा सके। सरकार की मंशा है कि समय रहते उचित नीति उपायों के माध्यम से इस बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण पाया जाए और आम जनता को राहत मिल सके।

