नई दिल्ली। भारत के रक्षा उत्पादन ने 2025-26 में नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए ₹1.78 लाख करोड़ तक की उपलब्धि हासिल की है। यह आंकड़ा पिछली वित्तीय वर्ष की तुलना में 15% की वृद्धि को दर्शाता है, जब उत्पादन ₹1.54 लाख करोड़ था। इस वृद्धि से स्पष्ट होता है कि भारत ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर मजबूती से कदम बढ़ाए हैं।
विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है कि पिछले चार वर्षों में, यानी 2020-21 से अब तक रक्षा उत्पादन में 110 प्रतिशत से अधिक का जबरदस्त उछाल आया है। उस वर्ष रक्षा उत्पादन ₹84,643 करोड़ था, जो आज के आंकड़े के आधे से भी कम था। यह विकास न केवल भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करता है बल्कि देश के आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस शानदार वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल, रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश की अनुमति, और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहन देना शामिल है। इससे न केवल स्थानीय उद्योग को बढ़ावा मिला है, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले उपकरणों के विकास और उत्पादन में भी सुधार हुआ है।
रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने बताया कि उत्पादन में वृद्धि ने रोजगार के अवसरों को बढ़ावा दिया है और भारत को विश्व स्तर पर रक्षा उपकरणों का एक महत्वपूर्ण प्रदाता बनने की दिशा में अग्रसर किया है। देश के स्वदेशी स्वरूप और नवीनतम तकनीकों के मिश्रण ने इस सेक्टर को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती प्रदान की है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इस वृद्धि से भारत की रक्षा क्षेत्र की निर्भरता आयात पर कम होगी, जिससे मुद्रा स्फीति पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी और विदेशी मुद्रा संरक्षण संभव होगा। भविष्य में रक्षा उत्पादन में और अधिक बढ़ोतरी की उम्मीद है, क्योंकि सरकार नई तकनीकों के विकास और उत्पादन बढ़ाने के लिए निरंतर निवेश कर रही है।
अंत में कहा जा सकता है कि 2025-26 में ₹1.78 लाख करोड़ का रक्षा उत्पादन आंकड़ा देश के लिए एक गर्व की बात है, जो आने वाले वर्षों में भारत को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एक आत्मनिर्भर और मजबूत शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।
