संयुक्त राष्ट्र में भारत ने कहा है कि जिन देशों को एफएटीएफ की निगरानी में नकारात्मक आकलन का सामना करना पड़ता है, उन्हें अपनी कमियों को दूर करना चाहिए और घरेलू कानून प्रवर्तन को मजबूत बनाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इन देशों को वित्तीय पारदर्शिता में सुधार करना आवश्यक है तथा आतंकवादी वित्तपोषण नेटवर्क के खिलाफ अपरिवर्तनीय कार्रवाई प्रदर्शित करनी चाहिए।
भारत के प्रतिनिधि ने यह बात संयुक्त राष्ट्र की एक बैठक में कही, जहां उन्होंने वैश्विक आतंकवाद और आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एफएटीएफ जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का मतलब जांच की गहराई और प्रभावशीलता से डरना है, जो वैश्विक वित्तीय व्यवस्था की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) एक अंतरराष्ट्रीय निकाय है जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण को खत्म करने के लिए मानकों और नीतियों को विकसित करता है। भारत ने यह भी जोर दिया कि सदस्य देश अपने वित्तीय तंत्र को पारदर्शी बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएं ताकि अवैध गतिविधियों की जांच आसानी से की जा सके।
आलोचकों द्वारा एफएटीएफ के प्रभाव को कमजोर करने का प्रयास केवल उन देशों की छुपी कमजोरियों को उजागर करता है, जो जांच के दायरे में आते हैं। भारत ने स्पष्ट किया कि वैश्विक आतंकवाद से निपटने के लिए विश्वसनीय, पारदर्शी और कठोर प्रणाली का होना आवश्यक है, जिससे वित्तीय संसाधनों का दुरुपयोग न हो।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी चाहिए कि वह एफएटीएफ के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त और निर्णायक कदम उठाए, जिससे विश्व शांति और सुरक्षा बनी रहे। भारत का मानना है कि केवल साझा प्रयासों से ही वैश्विक आतंकवाद और उसके वित्तीय नेटवर्क को प्रभावी रूप से कमजोर किया जा सकता है।
इस प्रकार, भारत की यह टिप्पणी वैश्विक मंच पर आतंकवाद विरोधी वित्तपोषण में सुधार और पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखी जा रही है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि आतंकवाद की लड़ाई में वित्तीय क्षेत्र की भूमिका को कम आंकना या उसकी जांच से किनारा करना समुदाय के लिए लंबे समय में हानिकारक साबित होगा।

