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As countries urbanise, 38% of world's population will live in large cities by 2100: Study
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Delhi HC restrains Ilaiyaraaja from broadcasting songs from 134 films in Saregama copyright dispute

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही में प्रसिद्ध संगीतकार इलैयाराजा को 134 फिल्मों के गीतों को प्रसारित करने से रोकने का आदेश दिया है। यह आदेश सरेगामा और इलैयाराजा के बीच कॉपीराइट विवाद के मद्देनजर आया है, जिसमें मुख्य मुद्दा संगीत संबंधित अधिकारों का दायरा था।

अदालत ने स्पष्ट किया कि इलैयाराजा के कॉपीराइट अधिकार केवल उनके द्वारा रचित संगीत रचनाओं तक सीमित हैं और आवाज रिकॉर्डिंग पर उनका अधिकार नहीं माना जाएगा। न्यायालय ने कहा कि यदि विवादित साउंड रिकॉर्डिंग का उपयोग बिना अनुमति किया जाता है, तो वह कॉपीराइट का उल्लंघन माना जाएगा।

सरेगामा ने इस विवाद में इलैयाराजा पर यह आरोप लगाया था कि उन्होंने उनकी रिकॉर्डिंग सामग्री का अनुचित उपयोग किया है। दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश ने इस मामले में स्पष्टता प्रदान की है कि संगीतकारों के अधिकार और रिकॉर्डिंग कंपनियों के अधिकार अलग-अलग होते हैं।

संगीत उद्योग में यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे कॉपीराइट सुरक्षा की सीमाओं और अधिकारों के विभाजन को लेकर एक मिसाल कायम होगी। न्यायालय के अनुसार, संगीतकारों को उनके संगीत रचना के लिए अधिकार प्राप्त होते हैं, लेकिन रिकॉर्डिंग की वितरण या प्रसारण के लिए संबंधित रिकॉर्डिंग कंपनी से अनुमति आवश्यक होती है।

यह मामला संगीत और कॉपीराइट कानून के जटिल पहलुओं पर प्रकाश डालता है, जो आने वाले समय में अन्य संगीतकारों और रिकॉर्डिंग कंपनियों के बीच मामलों को प्रभावित कर सकता है। संगीतकार इलैयाराजा ने अभी तक इस आदेश पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है, जबकि सरेगामा ने इसे कॉपीराइट संरक्षण के प्रति न्यायालय का सकारात्मक निर्णय बताया है।

इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि भारतीय कॉपीराइट कानून के अंतर्गत संगीत रचनाएं और उनकी रिकॉर्डिंग अलग-अलग अधिकारों के तहत आती हैं और दोनों के लिए अलग-अलग अनुमतियां आवश्यक हैं। इससे भविष्य में कॉपीराइट संबंधित विवादों को सुलझाने में मदद मिलेगी।

कुल मिलाकर, दिल्ली उच्च न्यायालय के इस आदेश ने भारत में कॉपीराइट कानून के तहत संगीत अधिकारों के संरक्षण और उनके प्रभाव के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि कलाकारों और म्यूजिक लेबल के बीच पारदर्शी और कानूनी समझौते आवश्यक हैं।

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