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UN, strapped for cash, warns time running out to make payments
संयुक्त राष्ट्र कोष संकट में, भुगतानों के लिए समय समाप्ति की चेतावनी
CBI questions former Trinamool MLA in R.G. Kar rape and murder case
सीबीआई ने आर.जी. कर बलात्कार एवं हत्या मामले में पूर्व तृणमूल विधायक से पूछताछ की
Indian Navy’s INS Trikand thwarts piracy attempt on merchant vessel in Gulf of Aden
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अम्मा संकट: अभिनेत्री श्वेता मेनन ने कहा ‘अगले चुनाव तक अध्यक्ष पद जारी रखूंगी’
'We will be front page news after this' - Tucker toasts 'absolutely incredible' Ireland effort
‘‘हम इसके बाद पहले पन्ने की खबर बनेंगे’’ – टकर ने आइरिश प्रयास को ‘पूरी तरह अद्भुत’ बताया
Nakshatras to Avoid for Borrowing Money, Loans & Financial Transactions
ऋण, उधारी और वित्तीय लेन-देन के लिए बचने योग्य नक्षत्र
Data analysis finds a common cricket wisdom may be a myth
डेटा विश्लेषण से पता चला कि क्रिकेट की एक सामान्य धारणा myth हो सकती है
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नियामगिरि के डोंगरिया कोंध: जहां जंगल, भोजन और आस्था बनाते हैं रोज़मर्रा की ज़िन्दगी
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स्पाइसजेट ने चेन्नई से अपनी सेवाएं क्यों बंद कर दीं? | पूरी व्याख्या
Consider Teesta water sharing deal under ‘current circumstances’: Bangladesh FM post BJP’s Bengal win

ढाका। बंगाल में हाल ही में भाजपा की जीत के बाद तीस्ता नदी को लेकर जल साझाकरण को लेकर नए सिरे से बहस तेज हो गई है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने इस बात का खुलासा किया है कि तीस्ता जल साझा करने के मसले पर भारत के विभिन्न राज्यों की राजनीतिक स्थिति और हाल के चुनाव नतीजों को ध्यान में रखते हुए बातचीत की जा रही है।

विदेश मंत्री ने यह भी माना है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस जल समझौते के लिए एक बड़ी बाधा के रूप में देखी जा रही हैं। इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि बंगाल में ममता बनर्जी का तीस्ता जल समझौते का विरोध कई बार सामने आ चुका है, जिससे बातचीत में तनाव बना हुआ है। इसके बावजूद, बांग्लादेश की सरकार ने इस मुद्दे को लेकर आक्रामक रुख अपनाते हुए भारत से इस मामले को प्राथमिकता देने की अपील की है।

विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा है कि वे जल्द ही चीन के राष्ट्रपति की मेजबानी के लिए बीजिंग जा रहे हैं, और इस दौरान तीस्ता जल समझौते को भी वार्ता की एजेंडा में शामिल किया जाएगा। उनका कहना था, “बिलकुल, तीस्ता मुद्दा चीन के साथ भी चर्चा का विषय रहेगा,” जिससे यह संकेत मिलता है कि जल संसाधनों को लेकर कई देशों के बीच बातचीत का दायरा बढ़ सकता है।

बांग्लादेश की सरकार का यह भी दावा है कि वे तीस्ता नदी के पानी का अधिक हिस्सा हासिल करना चाहते हैं ताकि उनकी कृषि और जनजीवन बेहतर हो सके। तीस्ता नदी, जो भारत और बांग्लादेश के बीच बहती है, दोनों देशों के लिए जल संसाधन के लिए अहम है, और इसके सहयोग से क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा मिल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल में राजनीतिक अस्थिरता और ममता सरकार की तीस्ता जल साझाकरण के प्रति रवैया समस्या को बढ़ा रहा है। साथ ही, बीजिंग यात्रा के दौरान यह देखना होगा कि चीन भारत और बांग्लादेश के विवादों में कैसे मध्यस्थता करता है, या फिर यह मुद्दा द्विपक्षीय स्तर तक सीमित रहता है।

वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए इस मसले पर आगे की बातचीत को लेकर सभी की नजरें भारत सरकार पर टिकी हैं, जो कि इस विवाद को सुलझाने में कूटनीतिक रूप से कितना सफल होता है, यह समय ही बताएगा।

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