नई दिल्ली: त्रिनामूल कांग्रेस के अलग गुट का एक 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करेगा। यह गुट, जिसकी अगुवाई रीतब्रत बनर्जी कर रहे हैं, चुनाव आयोग के समक्ष अपना दावा दर्ज कराएगा।
जानकारी के अनुसार, इस प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य चुनाव आयोग को यह विश्वास दिलाना है कि वे पार्टी के वास्तविक प्रतिनिधि हैं और उन्हें त्रिनामूल कांग्रेस के नाम पर चुनाव लड़ने का अधिकार दिया जाना चाहिए। इस मुमकिन दावे से पार्टी के आंतरिक विवाद और भी गहराते दिख रहे हैं।
चुनाव आयोग की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ आयोग के अन्य सदस्यों की भी मौजूदगी होगी। प्रतिनिधिमंडल का मानना है कि उनका यह कदम त्रिनामूल कांग्रेस के मूल सिद्धांतों और जनता की आवाज को सही रूप से प्रतिनिधित्व करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस कदम से आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी की स्थिति पर असर पड़ सकता है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने अभी तक इस मामले पर औपचारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की है।
इससे पहले भी इस गुट ने अपनी अलग पहचान बनाने के लिए कई प्रयास किए हैं, जिसमें अपनी नीतियों और कार्यों से पार्टी में सुधार की मांग शामिल है। ऐसे में चुनाव आयोग के सामने अपनी भूमिका स्पष्ट करना उनके लिए निर्णायक सिद्ध हो सकता है।
चुनाव आयोग का फैसला इस विवाद का समाधान निकाला सकता है या फिर पार्टी के विभाजन को और गहरा सकता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों पर नज़र बनी है कि आयोग इस संवेदनशील मसले पर किस प्रकार की कार्रवाई करता है।
इस बीच त्रिनामूल कांग्रेस के समर्थकों का भी ध्यान पूरी प्रक्रिया पर केंद्रित है, क्योंकि इस फैसले का भविष्य की राजनीति पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। पार्टी के दोनों फाड़ों द्वारा अपने-अपने दावे मजबूत करने के लिए साक्ष्य और समर्थन जुटाया जा रहा है, ताकि आयोग के समक्ष अपनी उपस्थिति को प्रभावी बनाया जा सके।
अगले दिनों में इस मामले की और जानकारी आने की संभावना है, जब चुनाव आयोग इस गुट के दावों की समीक्षा करेगा। इस राजनीतिक घटना से पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति में नयापन आने की उम्मीद की जा रही है।

