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‘‘हम इसके बाद पहले पन्ने की खबर बनेंगे’’ – टकर ने आइरिश प्रयास को ‘पूरी तरह अद्भुत’ बताया
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नई दिल्ली: केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने जनवरी में ऐसी कंपनियों के लिए छूट मांगी थी जिनके भारत में निर्माण इकाइयां हैं और जो महत्वपूर्ण विद्युत परियोजनाओं में शामिल हैं। इस छूट के तहत, चार चीनी संबंधित पावर उपकरण निर्माता कंपनियों को अब सरकारी परियोजनाओं के लिए बोली लगाने की अनुमति दे दी गई है।

यह निर्णय भारत सरकार द्वारा ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने एवं स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है। मंत्रालय की इस नीति का लक्ष्य है कि विद्युत क्षेत्र के विकास में अधिक प्रतिस्पर्धात्मकता आए और साथ ही विदेशी निवेशकों को प्रोत्साहन मिले।

सरकारी अधिकारियों ने बताया कि संबंधित कंपनियों ने भारत में मजबूत उत्पादन आधार स्थापित किया है, जिससे यह आवश्यक हो गया कि उन्हें नीतिगत छूट प्रदान की जाए ताकि वे सरकारी परियोजनाओं में सक्रिय रूप से भाग ले सकें। यह कदम चीन से संबंधित उपकरणों की निर्भरता को सीमित करते हुए घरेलू उद्योग को बढ़ावा देगा।

विद्युत मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह निर्णय विस्तृत जांच और विचार-विमर्श के बाद लिया गया है, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी मानकों की दृष्टि से किसी प्रकार की कमी न रहे। इस नीति के कारण, बिजली क्षेत्र में आवश्यक सामग्रियों और उपकरणों की उपलब्धता और गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत के पावर सेक्टर में निवेश बढ़ाने और उत्पादन क्षमता विस्तार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे सरकारी परियोजनाओं की लागत-कुशलता और समय पर पूरा होने की संभावना भी बढ़ेगी।

सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा और इसके तहत चयनित कंपनियों को नियमित निगरानी का भी सामना करना होगा। इससे आम जनता को बेहतर और भरोसेमंद विद्युत सेवा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

इस पहल से न केवल विद्युत क्षेत्र में नई तकनीकों का प्रवेश संभव होगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे, जो आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा। भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए यह रणनीति आवश्यक मानी जा रही है।

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