हाल ही में रिलीज हुई 2016 की क्लासिक फिल्म ‘मोआना’ की शॉट-फॉर-शॉट लाइव-एक्शन रीमेक ने दर्शकों को निराश किया है। इस रीमेक में मौलिकता की कमी साफ झलकती है और न तो यह कोई नया दृष्टिकोण प्रस्तुत कर पाता है और न ही दृश्यात्मक कल्पना के मामले में कुछ खास कहता है।
2016 की एनिमेटेड ‘मोआना’ ने अपनी अनोखी कहानी, प्रभावशाली एनिमेशन और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के कारण आलोचकों और दर्शकों दोनों का दिल जीता था। लेकिन इस नए संस्करण ने उस जादू को बनाए रखने में असफलता दिखाई। ड्वेन जॉनसन, जो मोआना की यात्रा में एक अहम किरदार निभाते हैं, इस रीमेक में तो हैं, लेकिन उनका प्रदर्शन भी कहानी को नया आयाम नहीं दे पाता।
फिल्म के दृश्यांकन और सेट डिज़ाइन में भी कोई नवीनता देखने को नहीं मिलती। अधिकांश दृश्य मूल फिल्म की ही तरह नकल किए गए हैं, जिससे वैचारिक ताजगी की कमी महसूस होती है। दर्शकों को जोड़े रखने वाला वह जादू और भावुकता इस रीमेक से गायब नजर आती है।
समीक्षकों का मानना है कि इस फिल्म को एक सरलीकृत रीमेक के बजाए, एक रचनात्मक पुनःकल्पना के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए था, ताकि यह नए दर्शकों को मोहित कर सके और पुराने प्रशंसकों के期待 पर खरी उतर सके।
संक्षेप में कहा जाए तो, ‘मोआना’ की यह लाइव-एक्शन रीमेक न तो कहानी में कोई नया पहलू जोड़ पाई है और न ही सौंदर्यात्मक दृष्टि से कुछ अलग। यह फिल्म उन लोगों के लिए उपयुक्त नहीं है जो मूल क्लासिक के भावनात्मक प्रभाव की तलाश में हैं।

