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‘Punjab’s painful past is not a script to be selectively edited to suit a narrative,’ says Minister Bittu

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने हाल ही में ‘सतलुज’ नामक फिल्म के निर्माताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वे “रचनात्मक स्वतंत्रता” के पीछे छिपकर विवादित दावों को स्थापित इतिहास के रूप में पेश नहीं कर सकते। मंत्री ने स्पष्ट किया कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करना पंजाब के लोगों के लिए न्याय नहीं है।

मंत्री बिट्टू ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “इतिहास किसी की मर्जी से बदला या संशोधित नहीं किया जा सकता। जब कोई तथ्य विवादित है, तो उसे इतिहास के रूप में प्रस्तुत करना निंदनीय है। ‘सतलुज’ के निर्माता इस तथ्य को समझें कि उनकी कृतियों की जांच होगी, और वे यह बहाना नहीं बना सकते कि यह केवल रचनात्मक स्वतंत्रता का हिस्सा था। हमें इतिहास के प्रति जिम्मेदारी निभानी होगी, खासकर जब यह हमारे पूर्वजों के संघर्ष और पीड़ा से जुड़ा हो।”

उन्होंने आगे कहा कि पंजाब के इतिहास को केवल एक राजनीतिक या सांप्रदायिक एजेंडा के अनुरूप तार-तार करना एक गंभीर मुद्दा है, जो सामाजिक सौहार्द और भविष्य की पीढ़ी के लिए खतरनाक हो सकता है। इस तरह की फिल्मों और अभिलेखों द्वारा फैलाई गई गलत धारणाएँ सामाजिक मतभेदों को बढ़ावा देने में योगदान दे सकती हैं।

वहीं, विशेषज्ञों का भी मानना है कि इतिहास को स्रोत आधारित तथ्यों के आधार पर ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इतिहासकारों का कहना है कि किसी भी विवादित विषय को तथ्यों और प्रमाणों के साथ संतुलित दृष्टिकोण से दिखाना आवश्यक होता है, जिससे समाज में गलतफहमियों का अंत हो सके।

केंद्र और राज्य सरकारें भी ऐसे मामलों में सतर्क रहने की बात कह रही हैं और इतिहास के गलत चित्रण को रोकने के लिए पैरवी कर रही हैं। मंत्री बिट्टू ने सभी फिल्मकारों और लेखकों से अपील की है कि वे इतिहास को उस सच्चाई के आधार पर पेश करें जो सबके लिए स्वीकार्य हो और साथ ही विवादित दावों को ऐसे प्लेटफार्म पर न लाएं जो सामाजिक सद्भाव को प्रभावित कर सकें।

इस विवाद के बीच, फिल्म निर्माता सपष्ट रूप से अपनी बात रखने के लिये तैयार नहीं हैं, लेकिन सामाजिक मंचों पर इस मुद्दे ने चर्चा का क्षेत्र बना लिया है। टिप्पणीकार यह भी कहते हैं कि रचनात्मक स्वतंत्रता और इतिहास के प्रति जवाबदेही के बीच सटीक संतुलन बनाना अत्यंत आवश्यक है, जिससे कला का नुकसान न हो और साथ ही समाज को भी भ्रमित न किया जाए।

पंजाब का इतिहास गौरवशाली होने के साथ-साथ संवेदनशील भी है। इसलिए इसे सही आठ्यात्मक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करना अति आवश्यक है। मंत्री बिट्टू के इस बयान ने एक बार फिर से इस बहस को नए सिरे से गति दी है।

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