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NEET paper leak: Lakhs march to Parliament, seek Education Minister’s resignation
नीट पेपर लीक: लाखों प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्च कर शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग की
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तमिलनाडु कानून मंत्री आर. निर्मलकुमार ने डीएमके के विलाथीकुलम विधायक जी.वी. मार्कंडयन की गिरफ्तारी का समर्थन किया
Perspectives: Hyderabad’s State Gallery of Art showcases works of 50 contemporary artists
दृष्टिकोण: हैदराबाद की राज्य कला गैलरी में 50 समकालीन कलाकारों के उत्कृष्ट कार्य प्रदर्शित
US and Iran dig in over the Strait of Hormuz, showing the limits of intensifying airstrikes
यूएस और ईरान होर्मुज जलसंधि पर संघर्षरत, वायु हमलों की तीव्रता की सीमाएं उजागर
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टाटा स्टील ने झारखंड में 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया, 2,000 रोजगार सृजित होंगे
Perspectives: Hyderabad’s State Gallery of Art showcases works of 50 contemporary artists
हैदराबाद के स्टेट गैलरी ऑफ आर्ट में 50 समकालीन कलाकारों की कृतियाँ प्रदर्शित
Perspectives: Hyderabad’s State Gallery of Art showcases works of 50 contemporary artists
परिप्रेक्ष्य: हैदराबाद के स्टेट गैलरी ऑफ आर्ट में 50 समकालीन कलाकारों के अभिव्यक्तियाँ
Why you’re probably not watching The Odyssey in ‘real’ IMAX | Explained

फिल्ममेकर क्रिस्टोफर नोलन की नवीनतम कृति ‘द ओडिसी’ को लेकर सिनेमा प्रेमियों के बीच काफी उत्साह है। नोलन ने इस फिल्म को पूरी तरह से 65mm पर फिल्माया है, जो कि पारंपरिक फिल्मांकन की तुलना में कहीं अधिक विस्तृत और जीवंत चित्र प्रस्तुत करता है। लेकिन दर्शकों को यह जानकर हैरानी हो सकती है कि उनके सामने जो फिल्म चल रही है, वह ‘रियल’ IMAX अनुभव से भिन्न हो सकता है।

IMAX स्क्रीनिंग्स के लिए पारंपरिक तौर पर फिल्म को डिजिटल या विभिन्न प्रारूपों में बदला जाता है ताकि इसे बड़े पर्दे पर उचित गुणवत्ता के साथ दिखाया जा सके। हालांकि 65mm फिल्म उच्च गुणवत्ता की गारंटी देती है, अधिकांश सिनेमाघरों में जो IMAX स्क्रीनिंग होती है, वहां इस फिल्म को जरूरी नहीं कि मूल 65mm फॉर्मेट में दिखाया जाए। इस वजह से वास्तविक IMAX अनुभव और जो दिखता है, उसमें अंतर हो सकता है।

नोलन के लिए यह तकनीकी और कलात्मक दोनों ही दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि उनकी फिल्म का हर फ्रेम अपने सर्वोच्च रूप में प्रस्तुत हो। उन्होंने विशेष रूप से इस फॉर्मेट को चुनकर दर्शकों को बिना कमी के गहराई और विस्तार देने की कोशिश की है। लेकिन सिनेमाघरों की तकनीकी सीमाओं, प्रोजेक्शन सिस्टम और डिजिटल रूपांतरण की प्रक्रिया के चलते इस अनुभव में कुछ बदलाव संभव हैं।

IMAX के तकनीकी मानदंड और उनके स्क्रीनिंग मैकेनिज्म के कारण भी यह फर्क आता है। कई बार फिल्म को डिजिटल फॉर्मेट में कन्वर्ट किया जाता है, या 70mm फिल्म की जगह 15/70 IMAX स्ट्रिप्स का उपयोग होता है, जिससे दर्शनीय गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसीलिए, कई फिल्म समीक्षकों और विशेषज्ञों का मानना है कि ‘द ओडिसी’ का असली अनुभव तभी मिलता है जब इसे 65mm या IMAX 70mm में प्रदर्शित किया जाए।

फिल्म उद्योग में यह समस्या नई नहीं है। बड़ी बजट वाली फिल्में अक्सर तकनीकी चुनौतियों का सामना करती हैं कि कैसे उनकी कला को सही रूप में प्रदर्शित किया जाए। वहीं, दर्शकों के लिए भी जरूरी है कि वे IMAX स्क्रीन्स और उस फॉर्मेट के बारे में ज्ञान रखें जहां फिल्म दिखाई जा रही है।

संक्षेप में, क्रिस्टोफर नोलन की ‘द ओडिसी’ 65mm फिल्मिंग की विशिष्टता को दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश करती है, लेकिन सिनेमाघरों में जो अनुभव मिलता है वह कुछ हद तक कम हो सकता है। यह कला और तकनीक के बीच के अंतर को दर्शाता है, जो आज भी फिल्म प्रजेंटेशन में एक चुनौती बनी हुई है।

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