नई दिल्ली: आसियान मंत्री समूह की हालिया बैठक में क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर के कई ज्वलंत मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। इस बैठक में यूएस सचिव विदेश मार्को रुबियो, चीनी विदेश मंत्री वांग यी और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव समेत कई शीर्ष कूटनीतिज्ञों ने हिस्सा लिया। प्रमुख विषयों में आयरान युद्ध, म्यांमार संकट और साउथ चाइना सी में बढ़ते तनाव शामिल थे।
बैठक के दौरान सभी प्रतिभागियों ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए संवाद और सहयोग की महत्ता पर जोर दिया। खासतौर पर आयरान युद्ध की तल्ख हालात ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सक्रिय भूमिका निभाने पर मजबूर कर दिया है। मुद्रा संकट से उपजे राजनीतिक और आर्थिक दुष्प्रभावों को कम करने के लिए संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया।
म्यांमार में जारी संकट भी चर्चा का एक अहम हिस्सा रहा। इसके कारण क्षेत्र में शरणार्थी संकट, मानवाधिकार उल्लंघन और राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति उत्पन्न हो रही है। ASEAN देशों ने मिलकर समाधान निकालने की पहल को प्राथमिकता दी।
साउथ चाइना सी में समुद्री दावों को लेकर जो तनाव बढ़ रहा है, उसे लेकर भी सभी मंत्रियों ने सावधानी बरतने तथा विवादों के शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालने पर सहमति जताई। क्षेत्रीय देश और वैश्विक शक्तियां दोनों इस विवाद को लेकर सजग हैं, और इसे लेकर गठजोड़ बने हुए हैं।
इस औपचारिक बैठक में उपस्थित सभी कूटनीतिज्ञों ने क्षेत्रीय सुरक्षा एवं विकास की दिशा में मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई। ASEAN ने भविष्य में भी इस तरह की बहुपक्षीय बैठकों के माध्यम से संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने का संकल्प लिया है, ताकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि कायम रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मंच पर विश्व की बड़ी शक्तियों का सहभागिता अपने आप में आशाजनक है, जिससे विवादित मुद्दों पर आपसी समझ और समाधान संभव हो सकेगा। आने वाले समय में इन चर्चाओं के प्रभाव से क्षेत्रीय नीति और कूटनीति में संतुलन आएगा, जो पूरे एशिया के लिए सकारात्मक सिद्ध होगा।

