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Global wars are delaying FTA talks, accounting for one-fifth of India’s trade
वैश्विक युद्धों के कारण भारत के मुक्त व्यापार समझौता वार्ता में देरी, व्यापार का एक-पाँचवां हिस्सा प्रभावित
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Global wars are delaying FTA talks, accounting for one-fifth of India’s trade

नई दिल्ली। वैश्विक युद्धों और राजनीतिक अस्थिरता ने भारत की मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इन युद्धों के चलते भारत के लिए विशेष महत्वपूर्ण FTAs के समापन में देरी हो रही है, जो देश के कुल व्यापार का लगभग एक-पाँचवां हिस्सा हैं।

भारत विभिन्न वैश्विक आर्थिक गठबंधनों के साथ स्वतंत्र व्यापार समझौतों की प्रक्रिया में है, जिनमें गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के देशों, इजराइल और रूस के नेतृत्व वाले यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ वार्ता शामिल हैं। ये समझौते भारत के व्यापार के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं, जिनका समापन भारत के आर्थिक विकास और निर्यात बढ़ाने में सहायक होगा।

ग्लोबल युद्धों ने न केवल राजनीतिक माहौल को अस्थिर किया है, बल्कि व्यापारिक वार्ताओं पर भी विपरीत प्रभाव डाला है। GCC देशों के साथ व्यापार, जो भारत के तेल एवं ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं, प्रभावित हुआ है। वहीं, रूस के नेतृत्व वाले यूरेशियन ब्लॉक के साथ व्यापारिक समझौतों में भी जटिलताएं सामने आई हैं। इससे जहां भारत का निर्यात दवाओं, टेक्सटाइल और कृषि उत्पादों में बाधित हुआ है, वहीं आयात में भी कमी आई है।

विश्लेषकों के अनुसार, FTAs में देरी से भारत को बाज़ारों में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ लेने में बाधा आ रही है। इससे अन्य देशों के साथ व्यापारिक अवसर छूट रहे हैं और दीर्घकालिक निवेश पर भी असर पड़ सकता है। इसके साथ ही, वैश्विक आर्थिक पुनरुद्धार की गति धीमी हो रही है, जिससे भारत सहित विकासशील देशों के लिए चुनौतियां बढ़ रही हैं।

सरकार ने इन वार्ताओं को पुनः गतिमान करने के लिए लगातार प्रयास जारी रखे हैं। मंत्रालयों के उच्चसातरीय समूह युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित होने के बाद वार्ताओं को अंतिम रूप देने पर काम कर रहे हैं। भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह इन महत्वपूर्ण समझौतों को शीघ्र पूरा कर आर्थिक सहयोग बढ़ाए और वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करे।

अतः यह स्पष्ट है कि वैश्विक युद्ध केवल कूटनीतिक संकट नहीं, बल्कि व्यापारिक एवं आर्थिक विकास की राह में बड़ी बाधा बनकर उभरे हैं। भारत को चाहिए कि वह अपने रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए इन वार्ताओं को पुनःसक्रिय कर वैश्विक व्यापार में अपनी भागीदारी बढ़ाए। इससे देश को आर्थिक वृद्धि के नए अवसर मिलेंगे और व्यवसायिक सहयोगों के माध्यम से विकास को गति मिलेगी।

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