पेरिस। यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में एक अहम पहल के तहत, फ्रांस ने 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर कड़ा प्रतिबंध लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। सितंबर से लागू होने वाले इस नियम के तहत, 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे नए सोशल मीडिया खाते नहीं बना पाएंगे, और जनवरी से पहले से मौजूद खातों पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लागू कर दिया जाएगा।
इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग बच्चों के मानसिक विकास और सामाजिक व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। फ्रांसीसी सरकार ने कहा है कि यह कदम बच्चों को हानिकारक सामग्री से बचाने और इंटरनेट पर उनकी सुरक्षा बढ़ाने के लिए आवश्यक है।
इस नए नियम के तहत, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे 15 वर्ष से कम उम्र के नए उपयोगकर्ताओं के खाते न बनाएं और मौजूदा खातों की निगरानी करें। फ्रांस की यह पहल न केवल बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए है, बल्कि इससे फ्रांसीसी और यूरोपीय स्तर पर डेटा गोपनीयता कानूनों को मजबूत करने की भी उम्मीद है।
फ्रांस के डिजिटल मामलों के मंत्री ने कहा, “हम बच्चों के लिए एक सुरक्षित डिजिटल माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सोशल मीडिया की दुनिया में तेजी से बढ़ रहे खतरों से निपटने के लिए यह कड़ा कदम जरूरी है।” उन्होंने यह भी बताया कि सरकार प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर बच्चों के लिए उपयुक्त नियंत्रण विकसित करेगी।
विशेषज्ञों ने इस निर्णय का स्वागत किया है, लेकिन कुछ ने इस पर चिंताएं भी जताई हैं कि कई बच्चे वयस्कता के नकली प्रमाणपत्रों के जरिए इस नियम की चूक कर सकते हैं। इसके अलावा, बच्चों के मनोवैज्ञानिक विकास और सामाजिक संपर्क पर डोर-टू-डोर जानकारी और परिवारों को जागरूक करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।
फ्रांस का यह क़दम यूरोपीय संघ में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर नई मिसाल कायम कर सकता है। आगे देखना होगा कि अन्य सदस्य देश भी इस तरह के कड़े नियम लागू करते हैं या नहीं। फिलहाल, माता-पिताओं और शिक्षकों से अपील की गई है कि वे बच्चों को डिजिटल दुनिया के सही और सुरक्षित उपयोग के प्रति शिक्षित करें।
इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल युग में न सिर्फ तकनीकी विकास, बल्कि उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और गोपनीयता भी प्राथमिकता बन गई है। फ्रांस की सरकार उम्मीद करती है कि इस प्रकार के कदम अन्य देशों के लिए भी मार्गदर्शक साबित होंगे।

