तेहरान, ईरान
मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने बुधवार को घोषणा की कि उसने लगातार 12वीं रात ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इन अभियानों के दौरान ईरान के सैन्य ढांचे, हथियार भंडारण केंद्रों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। वहीं ईरान के कई शहरों में विस्फोटों की आवाजें सुनाई देने और कुछ स्थानों पर भारी नुकसान होने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि दोनों देशों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उन क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनसे क्षेत्रीय जलमार्गों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को खतरा हो सकता है। अमेरिका का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले नागरिक जहाजों और वाणिज्यिक पोतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। इसी रणनीति के तहत ईरान के सैन्य ढांचे पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, ताजा हवाई हमलों में कई सैन्य प्रतिष्ठानों के अलावा हथियार भंडारण स्थलों और रक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। हमलों के बाद कई इलाकों में आग लगने और धुएं के गुबार उठने की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन करने में जुटी हैं। हालांकि ईरान ने अब तक हमलों से हुए वास्तविक नुकसान और संभावित हताहतों का विस्तृत आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है।
इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया पर ईरान को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिकी हितों, सैनिकों या सहयोगी देशों की सुरक्षा को चुनौती दी गई तो अमेरिका और अधिक सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप की इस टिप्पणी को क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दूसरी ओर ईरान ने अमेरिकी हवाई हमलों की आलोचना करते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून और अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। हालांकि ईरान की ओर से किसी बड़े जवाबी सैन्य अभियान की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
विश्लेषकों का कहना है कि हाल के दिनों में दोनों पक्ष केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि ऊर्जा संयंत्रों, परिवहन नेटवर्क और नागरिक बुनियादी ढांचे पर भी हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। इससे आम नागरिकों के सामने बिजली, परिवहन और आवश्यक सेवाओं से जुड़ी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार को भी प्रभावित कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की है। फिलहाल पूरे मध्य पूर्व में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और दुनिया की नजर अमेरिका तथा ईरान की अगली रणनीति पर टिकी है।

