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Box Office Collection: दुनियाभर में छाई ‘Jana Nayagan’, वहीं ‘Dhamaal 4’ भी कर रही ताबड़तोड़ कमाई; जानें दोनों फिल्मों का हाल
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Paper Leak Law: राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद परीक्षा संशोधन कानून लागू, दोषियों को 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना
गाजा में शांति की उम्मीद या नई रणनीति? हमास हथियार छोड़ने को तैयार, लेकिन इजरायल की चुप्पी से बढ़ा सस्पेंस
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PM Kisan Yojana: 2031 तक जारी रहेगी योजना, 3.15 लाख करोड़ की मंजूरी; जानें 24वीं किस्त कब आ सकती है
Kuldeep Yadav: जिस स्पिनर को टीम इंडिया में नहीं मिल रहा मौका, वही इंग्लैंड में मचा रहा कहर; बेन स्टोक्स भी हुए फिरकी का शिकार
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश: गोरखपुर के जिला अस्पताल से अपहृत 10 वर्षीय बालिका के दुष्कर्म और हत्या मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने जांच को नया मोड़ दे दिया है। अब तक पुलिस गला दबाकर हत्या की आशंका जता रही थी, लेकिन चिकित्सकीय जांच में सामने आया है कि आरोपित ने बालिका के शरीर पर धारदार हथियार से कई वार किए थे। रिपोर्ट के अनुसार जंघा, पेट और जबड़े पर गंभीर घाव मिले हैं, जिनसे अंदरूनी अंग भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों ने अपनी रिपोर्ट में इन चोटों का विस्तृत उल्लेख किया है। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये सभी चोटें बालिका के जीवित रहते पहुंचाई गई थीं या मृत्यु के बाद। इस संबंध में चिकित्सकों और फोरेंसिक विशेषज्ञों की राय भी ली जा रही है, ताकि विवेचना को और मजबूत बनाया जा सके। जांच अधिकारियों का मानना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए नए तथ्यों से अभियोजन पक्ष को महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलेंगे। पुलिस अब हत्या में इस्तेमाल किए गए धारदार हथियार की बरामदगी को प्राथमिकता दे रही है। इसके लिए आरोपित को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी की जा रही है। एसपी सिटी निमिष पाटिल ने बताया कि पुलिस चिकित्सकीय साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट और डीएनए जांच समेत सभी वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि हत्या में प्रयुक्त हथियार की बरामदगी से केस और मजबूत होगा तथा अदालत में प्रभावी ढंग से साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकेंगे। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और दोषी को कानून के तहत कड़ी सजा दिलाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

पुजुपुरम श्री सुभ्रमण्य स्वामी मंदिर में भव्य आध्यात्मिक उत्सव

एडावा, वर्कलाः पुजुपुरम श्री सुभ्रमण्य स्वामी मंदिर में महानविकार्ण कलशम 2026 का आयोजन आगामी 8 जुलाई, 2026 (बुधवार) को किया जाएगा। यह पावन समारोह दशकों बाद संपन्न हो रहा है और इसके लिए मंदिर प्रशासन सहित स्थानीय लोग व्यापक तैयारी में लगे हैं। यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए एक अनूठा आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करेगा और […]

ईश्वरमंगलम शिव मंदिर, नडुवाथ, मालप्पुरम

केरल के मालाबार क्षेत्र के मध्य में स्थित श्री ईश्वरमंगलम शिव मंदिर एक अद्वितीय भक्ति स्थल और वास्तुकला की सुंदरता का प्रतीक है। यह मंदिर मालप्पुरम जिले के वंडूर के पास, नडुवाथ इलाक़े में, ऊटी-गुरुवायूर राजमार्ग के किनारे स्थित है। यहां भगवान शिव और माता पार्वती को मुख्य देवता के रूप में पूजा जाता है। […]

रतनगिरि – उड़िशा की प्राचीन बौद्ध विरासत

रतनगिरि, जो कि भारत के ओडिशा राज्य के जाजपुर जिले में स्थित है, बौद्ध पुरातात्विक स्थलों में से एक महत्वपूर्ण स्थल है। यह स्थान बिरूपा नदी घाटी की सुरम्य पृष्ठभूमि में बसा हुआ है और इसे प्राचीन बौद्ध संस्कृतियों का केंद्र माना जाता है। यहां की पहाड़ियों पर बने मठ, स्तूप, और मूर्तियां इस क्षेत्र […]

शिवलिंग का उद्गम: भगवान शिव का एक पवित्र प्रतीक

हिंदू धर्म में शिवलिंग को भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है, जो अत्यंत श्रद्धेय और सम्मानित है। संस्कृत शब्द ‘लिंग’ का अर्थ सिर्फ एक सामान्य चिन्ह नहीं है, बल्कि इसे सृजन, ब्रह्मांडीय ऊर्जा और सर्वोच्च तत्व की अनंत प्रकृति का प्रतीक माना जाता है। इस पवित्र प्रतीक की उत्पत्ति और पूजा […]

दशावतार – भगवान विष्णु के दस दिव्य अवतार हिंदू भक्ति ब्लॉग

दशावतार: सनातन धर्म में भगवान विष्णु के दस अवतार हिंदू धर्म में यह आस्था प्राचीन काल से चली आ रही है कि जब भी धर्म का पतन होता है और अधर्म बढ़ने लगता है, तो भगवान विष्णु धरती पर अवतार लेकर मानवता की रक्षा करते हैं। इन अवतारों को दशावतार कहा जाता है, जो कि […]

विष्णु और ब्रह्मा द्वारा भगवान शिव की पूजा की कहानी

हिंदू धर्म के त्रिमूर्ति सिद्धांत और उनकी भूमिका हिंदू धर्म में ‘त्रिमूर्ति’ का अर्थ है ‘तीन दिव्य स्वरूप’, जिनमें भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव (महेश्वर) शामिल हैं। ये तीन देवता ब्रह्मांड के सृजन, संरक्षण और विनाश के कार्यों के लिए जाने जाते हैं। ब्रह्मा को ब्रह्मांड के सृष्टिकर्ता के रूप में पूजा जाता […]

मुरुदेश्वर मंदिर की कहानी – रावण और शिव के पवित्र आत्मलिंग की कथा

कर्नाटक के समुद्र तट पर स्थित मुरुदेश्वर मंदिर न केवल अपनी भव्यता और समुद्र के किनारे के मनोरम दृश्य के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी पृष्ठभूमि में भगवान शिव के आत्मलिंग से जुड़ी एक महत्त्वपूर्ण और रोचक कथा भी छिपी हुई है। इस मंदिर की उत्पत्ति की कहानी रावण के गहन तप और भगवान शिव […]

मडई कावु | कन्नूर में देवी भद्रकाली का पवित्र आवास

मडई कावु: कन्नूर में देवी भद्रकाली का पावन मंदिर केरल के कन्नूर जिले में सुदूर मडई हिल्स की चोटियों पर स्थित, मडई कावु श्री थिरुवरकट्टु कावु भगवती मंदिर अपने प्राचीन और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। यह मंदिर मुख्य रूप से देवी भद्रकाली को समर्पित है और उत्तर केरल के सबसे प्रतिष्ठित देवी […]

रामायण में सुग्रीव: किश्किंधा के वफादार वानर सम्राट की कहानी

रामायण के वफादार वानर सम्राट सुग्रीव की कहानी रामायण को भारतीय संस्कृति और इतिहास में एक अमूल्य महाकाव्य माना जाता है, जिसमें अनेक पात्रों और घटनाओं का समावेश है। इनमें से एक प्रमुख पात्र हैं सुग्रीव, जो किश्किंधा के वफादार वानर सम्राट और भगवान राम के समर्पित मित्र थे। सुग्रीव का जीवन त्याग, संघर्ष, मित्रता […]

उदयगिरी – ओडिशा में एक प्राचीन बौद्ध विरासत स्थल

उदयगिरी: ओडिशा की ऐतिहासिक बौद्ध धरोहर उदयगिरी, जो कि ओडिशा के जाजपुर जिले में स्थित है, एक प्रतिष्ठित बौद्ध पुरातात्विक स्थल के रूप में विख्यात है। यह स्थान कटक से लगभग 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में पहाड़ की तलहटी में बसा हुआ है, जो इसकी प्राकृतिक सुंदरता को और अधिक आकर्षक बनाता है। उदयगिरी को ओडिशा […]