नई दिल्ली: दिल्ली की सत्ताधारी दल आम आदमी पार्टी (AAP) में बड़ा संकट गहराता नजर आ रहा है, जब पार्टी के छह प्रमुख सांसदों ने इस्तीफा दे दिया है और भाजपा का समर्थन करने का ऐलान किया है। राघव चड्ढा के साथ ही राज्यसभा सांसद संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मलीवाल ने पार्टी से नाता तोड़ते हुए भाजपा में शामिल हो गए हैं।
इस अप्रत्याशित राजनीतिक बदलाव से हालिया दिनों में पार्टी की आंतरिक विवाद और नेतृत्व पर उठ रहे सवालों को और हवा मिली है। इन नेताओं का भाजपा में शामिल होना पार्टी की साख और आगामी चुनावों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
छह सांसदों का कहा क्या?
राघव चड्ढा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी में अब उनके विचारों और काम करने का तरीका स्वीकार्य नहीं रह गया था। उन्होंने भाजपा की नीतियों को बेहतर सेवा के लिए अधिक उपयुक्त बताया। अन्य सांसदों ने भी अपनी-अपनी वजहें साझा करते हुए संगठन में विकास रोकने वाले माहौल को इस्तीफे की मुख्य वजह बताया।
AAP का बयान और प्रतिक्रिया
आम आदमी पार्टी ने इस प्रकरण पर टिप्पणी करते हुए वे सभी नेताओं के इस्तीफे को धक्का मानते हुए कहा कि पार्टी की नीतियों और लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन से पीछे हटने वाले उनके लिए रास्ता साफ है। पार्टी प्रवक्ता ने आगे कहा कि आम आदमी पार्टी चुनौतियों का सामना करते हुए जनहित में काम करती रहेगी और ऐसे किसी बदलाव से प्रभावित नहीं होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के लिए यह कदम राजनीतिक रणनीति के अंतर्गत बड़ी सफलता है, क्योंकि इससे आप की साख कमजोर होगी। वहीं, दिल्ली की राजनीति में यह नई बहस और विवाद को जन्म देगा, जिससे आम जनता को जो सही है, उसकी जानकारी मिलनी आवश्यक है।
कुल मिलाकर, राघव चड्ढा समेत छह सांसदों का आप छोड़ना और भाजपा ज्वॉइन करना दिल्ली एवं राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक दंगल को और अधिक रोचक और जटिल बना देगा। आगामी महीनों में इसके परिणाम देखने को मिलेंगे कि इस कदम का जनता और राजनीतिक दलों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
