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Story of Valmiki
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पोर्ट एलिजाबेथ, 19 अप्रैल: थिरुवनंतपुरम के सुरेश सैम चांडी ने सदैव याद रखने योग्य उपलब्धि दर्ज करते हुए आयरनमैन साउथ अफ्रीका को पूरा कर एक वैश्विक धैर्य परीक्षण पूरा किया। उन्होंने तनाव से परिपूर्ण इस प्रतिस्पर्धा में खिताबी फिनिश हासिल कर छह महाद्वीपों में आयरनमैन दौड़ पूरी करने का गौरव प्राप्त किया।

सुबह की शुरूआत से ही इस कठिन ट्रायथलॉन में विविध टेस्ट सामने आए। पोर्ट एलिजाबेथ के समुद्र तट पर तैराकी, साइकिलिंग और मैराथन दौड़ ने प्रतिभागियों की सहनशक्ति को चुनौती दी। सुरेश, जो थिरुवनंतपुरम के एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं, ने पहले भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दौड़ें पूरी की हैं, लेकिन यह उपलब्धि उनकी फिटनेस और मानसिक दृढ़ता का परिचायक है।

सुयेेश ने इस दौड़ में कई अनुभवी खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए न केवल अपनी फिटनेस बल्कि स्मार्ट रणनीति का भी प्रदर्शन किया। आयरनमैन रेस विश्व भर में दुर्लभ और अत्यंत कठोर मानी जाती है, जिसमें प्रतियोगी को 3.8 किमी तैराकी, 180 किमी साइकिलिंग और अंत में 42.2 किमी की मैराथन पूरी करनी होती है। यह प्रतियोगिता अंत तक कई बार चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाकर चलने को मजबूर करती है।

सुयेेश के कोच और परिवार ने उनकी मेहनत और धैर्य की बेहद प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “सुयेेश ने न केवल भारतीय खेल जगत में अपनी पहचान बनाई है बल्कि पूरे विश्व में हमारे देश का नाम गर्व से रोशन किया। उनकी यह उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा बनी है।”

इस मुकाम तक पहुंचने के लिए सुरेश ने वर्षों विशेष प्रशिक्षण, मानसिक स्थिरता और समर्पण दिखाया है। वे भारतीय खेल समुदाय में विशेष पहचान के पात्र बन गए हैं और आने वाले समय में भी उनकी सफलता की उम्मीद की जा रही है।

आयरनमैन साउथ अफ्रीका में सफलतापूर्वक प्रतिस्पर्धा पूरी करने के साथ ही सुरेश ने भारत के लिए गर्व का क्षण प्रदान किया है। यह उपलब्धि न केवल सुरेश के करियर का उच्च बिंदु है बल्कि भारतीय स्पोर्ट्स में endurance खेलों को बढ़ावा देने वाली एक महत्वपूर्ण घटना भी है।

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