नई दिल्ली: वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और आर्थिक दबावों के बावजूद सरकार अपने पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) के प्रोत्साहन को बरकरार रखेगी। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2027 के लिए भी उच्च गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचा विकास पर जोर रहेगा।
वित्त मंत्रालय के इस अधिकारी ने कहा कि सड़कों, रेलवे, जल परिवहन, बंदरगाहों और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस रहेगा। इन क्षेत्रों में निवेश से न केवल आर्थिक विकास को गति मिलेगी बल्कि रोजगार सृजन और क्षेत्रीय समृद्धि भी बढ़ेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार का उद्देश्य दीर्घकालिक विकास के लिए मजबूत आधार तैयार करना है। इसलिए, हाल की वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और वित्तीय चुनौतियों के बावजूद, पूंजीगत व्यय के समर्थन में कटौती नहीं की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए यह रणनीति महत्वपूर्ण रहेगी क्योंकि बुनियादी ढांचे में निवेश देश की आर्थिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में सहायक होगा। इसके अलावा, बेहतर परिवहन और शहरी विकास से नागरिकों की जीवन गुणवत्ता में सुधार आएगा।
सरकार की योजना के तहत ये निवेश विभिन्न राज्यों और सरकारी निकायों के साथ समन्वय से किए जाएंगे। इससे क्षेत्रीय विकास में असंतुलन कम होगा तथा ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को लाभ मिलेगा।
इस पहल के अंतर्गत नई सड़कों और रेलवे नेटवर्क का विस्तार, बंदरगाहों का आधुनिकीकरण तथा शहरी परिवहन सुविधाओं को बेहतर करने पर ध्यान दिया जाएगा। उच्च गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचे से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और आयात-निर्यात संचालन और भी सुगम होंगे।
हालांकि, इस वित्तीय वर्ष में वैश्विक आर्थिक दबाव और कर्ज के बढ़ते बोझ के कारण चुनौतियां हैं, लेकिन सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि दीर्घकालिक आर्थिक विकास सुनिश्चित किया जा सके।
वित्त मंत्रालय के इस अधिकारी ने कहा, “हम स्थिर और सतत विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमें विश्वास है कि निवेश के इस रास्ते पर चलते हुए हम आर्थिक सुधारों और विकास लक्ष्यों को प्राप्त करेंगे।”
सरकार की यह नीति निवेशकों और बाजारों के लिए सकारात्मक संकेत है, जिससे घरेलू और विदेशी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके फलस्वरूप, राष्ट्रीय आय में सुधार होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
अतः, वित्त वर्ष 2027 में सरकार के कैपेक्स निवेश के क्षेत्र और प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं, जो भारत के आर्थिक सुदृढ़ीकरण और समावेशी विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगी।

